एक व्यक्ति-एक कार की नीति को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, कोर्ट ने कहा  याचिका तार्किक, लेकिन नीतिगत नीतियों में हस्तक्षेप से इंकार 

    एक व्यक्ति-एक कार की नीति को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, कोर्ट ने कहा  याचिका तार्किक, लेकिन नीतिगत नीतियों में हस्तक्षेप से इंकार 

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):  न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और पीएस नरसिम्हा की पीठ 'एक व्यक्ति एक कार की नीति' को झटका दिया है, कोर्ट ने गैर सरकारी संगठन सुनामी आन रोड की ओर दायर जनहित याचिका को सुनवाई से इंकार करते हुए कहा है कि यह मामला सरकार के क्षेत्राधिकार से जुड़ा है, कोर्ट इस मामले में दखल नहीं करेगी, ये नीतिगत मुद्दे हैं, जिन पर अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं.

    धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, हम इस तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकते हैं, दूसरी कार पर पर्यावरण टैक्स, वायु प्रदूषण के लिए कमीशन. यह एक नीतिगत मामला है. कोर्ट ने कहा कि हम हर उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते हैं, जिसकी चिंता शासन को करनी है. हम यहां कानूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए हैं. आपकी याचिका ईमानदार है लेकिन हम पर्यावरण नीति से संबंधित मुद्दों में प्रवेश नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा, "सरकार का राजस्व पक्ष करदाताओं के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा है. हमें उनकी मदद के लिए नहीं आना है. वे अपना प्रयास कर रहे हैं. "

    यहां बता दें कि याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि देश में हर साल तीस लाख कारें बिकती है. यदि एक व्यक्ति एक कार की नीति को लागू कर दिया जाय तो देश के पर्यावरण की स्थिति में काफी सकारात्मक सुधार हो सकता है, दूसरी कार खरीदने वाले लोगों पर पर्यावरण शुल्क लगाकर पर्यावरण के क्षेत्र में काम किया जा सकता है. याचिकाकर्ता की दलील थी कि कार खरीदने वालों के लिए अंतिम दाखिल रिटर्न की प्रति भी लगाना अनिवार्य किया जाय. इसके साथ ही प्रोफेशनल्स और कंपनियों को मिलने वाले कर लाभ वापस लिया जाय.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 


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