मिस्र में गोल्डन ममी के रहस्य को जानने के लिए शोध शुरू, जानिए इस ऐतिहासिक तथ्य को

    मिस्र में गोल्डन ममी के रहस्य को जानने के लिए शोध शुरू, जानिए इस ऐतिहासिक तथ्य को

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): मिस्र की ममी के बारे में सभी लोग जानते हैं. इस ममी से इतिहास के पन्नों को पढ़ने का भी प्रयास किया गया है. प्राचीन काल में मिस्र में शवों को दफनाने की परंपरा रही है. अभी यह विषय इसलिए चर्चा में आया है कि एक ममी जो किसी किशोर की है. वह सोने से पूरी तरह से कवर्ड है. इसको लेकर ना सिर्फ मिस्र बल्कि इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस ममी को पहली बार 1916 में जमीन से खोदकर निकाला गया था.

    इतिहासकारों के अनुसार सोने की परत से कवर किया हुआ है यह शव किसी किशोर का है क्योंकि इसके जीव और दांत इंटैक्ट हैं. यह भी प्रतीत होता है कि यह किसी कुलीन वर्ग से ताल्लुक रखता था. इसके जीभ गोल्ड से कवर्ड है. तस्वीरों से यह साफ स्पष्ट प्रतीत होता है कि दफनाने के वक्त इस शव को सैंडल पहनाया गया था और उसे सजाया भी गया था.

    मिस्र के इतिहासकार के अनुसार यह ममी टॉलमी काल की है. यह 23 सौ साल पुरानी है. इस पर अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के इतिहासकार शोध के लिए काहिरा जाने का प्लान किए हैं. मिस्र की सरकार भैया चाहती है कि इस संबंध में और अधिक शोध कार्य हो.

    ममी के बारे में जानिए

    प्राचीन काल में कुलीन वर्ग के राजनेता या फिर धार्मिक शख्सियतों को मरणोपरांत एक ताबूत में लेप लगाकर दफना दिया जाता था. यह माना जाता था कि यह लो एक दिव्य व्यक्ति रहे हैं. इन्हें फराओ की उपाधि दी जाती थी. मिस्त्र में यह प्राचीन मान्यता थी कि फराओ का जन्म तितली की तरह हुआ है जिस प्रकार से तितली जन्म के समय कुकून में रहती है.ठीक उसी प्रकार फराओ मरने के बाद एक विशेष प्रकार की तितली हो जाते हैं और उन्हें ताबूत में उसी तरह से पूरे विधि-विधान से दफना दिया जाना चाहिए. यहीं से ममी की परंपरा शुरू हुई थी.


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