22 जनवरी को होगी अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, जानिए इस ऐतिहासिक क्षण में झारखंड के श्रद्धालु कैसे पहुंचे रामनगरी  

    22 जनवरी को होगी अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, जानिए इस ऐतिहासिक क्षण में झारखंड के श्रद्धालु कैसे पहुंचे रामनगरी  

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):- नया साल के इंतजार के साथ-साथ रामनगरी अयोध्या में 22 जनवरी को ऐतिहासिक पल भी आने वाला है. इस दिन राम लला को मंदिर में विराजमान किया जाएगा और उनकी प्राण प्रतिष्ठा होगी. खुद पीएम मोदी इस क्षण का गवाब बनेंगे. ये इंतजार और अरमान आज का नहीं बल्कि सदियों का था, जिसे पूरा होने में अब कुछ दिन ही बचा हुआ है.

    अयोध्या में जोर-शोर से तैयारी चल रही है. तमाम इंतजाम के साथ-साथ सुरक्षा का भी मुक्कमल व्यवस्था की गई है. रामनगरी में देश के साथ ही विदेश से भी लोग पहुंचेंगे. भारी भीड़ आने की संभावना जताई जा रही है. देश के कौने-कौने से रामभक्त पहुंचेंगे. इसे लेकर रेलवे ने भी खास व्यवस्था करके रखा है. भारी भीड़ को काबू में करने के लिए रेलवे ने भी अलग-अलग जोन से 100 से अधिक विशेष ट्रेन चलायेगी. अयोध्या के लिए फ्लाइट सेवा भी एयर इंडिया ने शुरु किया है.  

    ऐसे जा सकते हैं अयोध्या

    जल जंगल और जमीन के प्रदेश झारखंड में भी काफी संख्या में श्रद्धालु आयोध्या पहुंचेंगे. ऐसे भी सवाल बना हुआ है कि आखिर कैसे पहुंचा जाए. क्योंकि, अयोध्या के लिए न तो सीधी फ्लाइट और न ही ट्रेन सेवा है. बस सेवा भी हैं तो कुछ गिने चुने जगह पर ही झारखंड में मौजूद है. अयोध्या जाने के लिए सबसे सरल और सुगम साधन ट्रेन है.

    कानपुर जाने के लिए बहुत सारी ट्रेन झारखंड से हैं, जहां श्रद्धालु ट्रेन से सफर करने के कानपुर पहुंचकर बस ले सकते हैं. वहां से अयोध्या की दूरी लगभग 500 किलोमीटर तक है. जो बस में सफर के दौरान तकरीबन 7 घंटे लगती है.

    इन ट्रेनों से ज्यादा सकता हैं कानपुर

    कानपुर जाने के लिए राम भक्त गरीब रथ (12877), राजधानी एक्सप्रेस (12453), स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस (12817), झारखंड एक्सप्रेस (12825), जम्मू तवी एक्सप्रेस(18309) पकड़ सकते हैं. जो रांची, धनबाद, बोकारो, पारसनाथ से पक़ड़ सकते हैं. इन ट्रेनों में स्लीपर का किराया 500 से 700 रुपए की रेंज का है. राजधानी ट्रेन में सफर के दौरान किराया कुछ ज्यादा पड़ेगा. 1800 तक किराया चुकाना पड़ सकता है.

    फ्लाइट से अयोध्या के लिए लखनऊ जाना होगा

    जहां तक फ्लाइट से अयोध्या जाने की बात है, तो राजधानी रांची के हवाई अड्डे से सीधी विमान सेवा अयोध्या के लिए नहीं है श्रद्धालु रांची से लखनऊ तक फ्लाइट के जरिए जा सकते हैं. रांची से गो एयर और एयर इंडिया की फ्लाइट उपलब्ध है. लखनऊ पहुंचने के बाद बस जरिए अयोध्या पहुंचा जा सकता है. जिसकी दूरी महज 134 किलोमीटर है. फ्लाइट लखनऊ पहुंचने के लिए 3000 से 5000 रुपए चुकाने पड़ेंगे.  

    सड़क मार्ग से सीधे जा सकते हैं अयोध्या

    जो रामभक्त ट्रेन और विमान से नहीं, बल्कि सड़क मार्ग के जरिए अयोध्या जाने का प्लान बनाए हुए हैं. वैसे लोग एनएच 19 होकर अयोध्या के लिए निकल सकते हैं. अगर राजधानी रांची से अयोध्या की दूरी को जाने तो ये करीब 667 किलोमीटर है. इस हिसाब से सड़क के जरिए रामनगरी पहुंचने के लिए 14 से 15 घंटे तक का वक्त लगेगा.

    22 जनवरी को भव्य कार्यक्रम

    मालूम हो कि भगवान राम की नगर अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी लंबे समय से की जा रही है. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिरकत कर इसकी अध्यक्षता करेंगे. रामलला को मंदिर में विराजमान करने और प्राण प्रतिष्ठा के दौरान पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ औऱ संघ प्रमुख मोहन भागवत भी गर्भगृह में मौजूद रहेंगे. इनके अलावा काशी विश्‍वनाथ और वैष्णोदेवी मंदिरों के प्रमुखों के साथ तकरीबन 4,000 संतों को भी यहां आमंत्रित किया गया है. 22 जनवरी के ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए 4000 मजदूर अलग-अलग शिफ्टों में दिन-रात काम में लगे हुए हैं. शहर की सजावट करने में किसी भी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ गई है. रंग-बिरंगी लाइटों के चलते शहर रात में रौशनी से नहाया हुआ नजर आयेगा.

    पीएम मोदी ने रखी थी राम मंदिर की आधारशिला

    भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी थी. इसके बाद निर्माण का काम शुरु हुआ और अब 22 तारीख को रामलला का मंदिर में स्थापित कर इसकी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. यह राम मंदिर का मुददा सदियों से एक प्रमुख मसला हिन्दु समुदाय के लिए रखा गया है. दरअसल, साल 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था, जिसके बाद हिन्दू पक्ष औऱ मुस्लिम पक्ष के बीच पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर  सुप्रीम कोर्ट में एक लंबी कानूनी लड़ाई चली. जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या मे विवादित भूमि पर मंदिर बनाने की इजाजत दी. इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया था कि नई मस्जिद के निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन मुहैया कराई जाए.


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