नीतीश के बयान पर सियासत तेज, जमकर बरसे पीके और चिराग, नीतीश को बताया अहंकारी  

    नीतीश के बयान पर सियासत तेज, जमकर बरसे पीके और चिराग, नीतीश को बताया अहंकारी  

    पटना(PATNA): शराबबंदी को लेकर विधानसभा में दिए गए सीएम नीतीश कुमार के बयान पर राजनीति तेज हो गयी है. लगातार विपक्ष के नेता नीतीश कुमार पर हमलावर हैं. इसे लेकर चिराग पासवान और प्रशांत किशोर ने भी नीतीश कुमार पर हमला बोला.

    दरअसल, छपरा जिले में जहरीली शराब के कारण अब तक 57 लोगों की मौत हो चुकी है. इसी को लेकर नीतीश कुमार ने कहा कि जो पिएगा वो मरेगा. इसके साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को किसी भी प्रकार के मुआवजा देने से भी इनकार किया.  

    चिराग ने मौत को बताया हत्या    

    इसी मामले में लोक जनशक्ति पार्टी(रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी नीतीश कुमार के इस बयान पर सवाल खड़ा किया है. लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष और जमुई के सांसद चिराग पासवान ने कहा कि इसको मौत कहना सबसे पहले बंद करना चाहिए. यदि किसी को जहर देकर मारते हैं तो वह हत्या होती है न कि मौत. बिहार में जबसे नीतीश कुमार राजद के साथ गए हैं तबसे लगातार इस तरह की हत्या हो रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका जिम्मेवार कौन हैं, किसी को तो इसकी जबाबदेही लेनी चाहिए. नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री हैं और शराबबंदी को लेकर सबसे अधिक सजग होते हैं. इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. क्या इसी तरह लोग मरते रहेंगे. उनके इस रवैया के कारण ही बिहार की यह हालत हो रही है.

    प्रशांत किशोर ने नीतीश को बताया संवेदनहीन और अहंकारी

    वहीं बिहार के शिवहर में जन सुराज पार्टी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसा संवेदनहीन इंसान नही देखा. उन्हें अफसोस है कि उन्होंने वर्ष 2014-15 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मदद की. उन्होंने कहा कि इस अहंकारी इंसान का सर्वनाश होना तय है. कोरोना महामारी के दौरान जब बिहार के लाखो लोग भूख से बिलबिला रहे थे और पैदल अपने घर लौट रहे थे, उस वक्त भी नीतीश कुमार अपने घर से नही लौटे. इतना ही नहीं छपरा में शराब से हो रही मौत पर भी नीतीश कुमार ने अपनी संवेदना जताने तक का काम नही किया. इतना ही नही प्रशांत किशोर ने जेडीयू और राजद के विलय के सवाल पर बोला कि मुख्यमंत्री राजद के साथ कभी कंफोटेंबल नही रह सकते. परिस्थिति ऐसी बन गई है कि उनको राजद के साथ रहना पड़ रहा है, कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की यह उनकी मजबूरी है.

     


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