आदिवासी के नाम पर बने विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक उनकी ही एंट्री नहीं, जानिये क्या है मामला

    आदिवासी के नाम पर बने विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक उनकी ही एंट्री नहीं, जानिये क्या है मामला

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड की पहली राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू अब देश की प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति बन चुकी हैं. इससे देश की 8.6 प्रतिशत आदिवासी  आबादी में हर्ष व्याप्त है. वे उनके शपथ ग्रहण के बाद दिये संबोधन में धरती आबा बिरसा मुंडा और तिलका मांझी समेत अनगिनत आदिवासी वीरों की शहादत और संघर्ष  का जिक्र करने की भी चर्चा है. इधर, ऐसे समय केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय आंध्रप्रदेश  (Central Tribal University of Andhra Pradesh) में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन में एक भी सीट जनजाति वर्ग की नहीं है. इसकी तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

    झारखंड में दिख रही तीव्र प्रतिक्रिया

    आंध्रप्रदेश के जनजातीय विश्वविद्यालय में आदिवासी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के ताजा मामले की प्रतिक्रिया झारखंड के आदिवासी प्रबुद्ध तबके में देखने को मिल रही है. इसमें सोशल एक्टीविस्ट सुनीता, हो कवयित्री सोनी तिरिया और लेखक-एक्टीविस्ट ग्लैडसन डुंगडुंग शामिल हैं. डुंगडुंग कहते हैं कि झारखंड के आदिवासी बहुल इलाके खासकर दक्षिणी छोटानागपुर क्षेत्र में बसे छोटे शहर या टाउन में चले जाईये. वहां आपको बड़े-बड़े दुकानों के नाम ‘‘आदिवासी’’ शब्द से मिलेगा. हालांकि कई के संचालक गैर-आदिवासी मिलेंगे. आदिवासी शब्द का उपयोग लाभ के लिए किया जा रहा है. ट्राइबल यूनिवर्सिर्टी इसका एक उदाहरण है. इस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की निकली विज्ञप्ति में एक भी सीट जनजाति वर्ग की नही है.

    2019 में हुई यूनिवर्सिटी की स्थापना

    विजयनगरम जिले के रेल्ली गांव में यह यूनिवर्सिटी है. 8 नवंबर 2018 को मोदी सरकार की कैबिनेट ने इस केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी थी. आन्ध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की 13 वीं अनुसूची में इसका उल्लेख है.  2019 में इसकी शुरुआत हुई. पहले चरण में 420 करोड़ रुपये इसकी स्थापना में खर्च हुए.

    क्या है देश में आदिवासियों की जनसंख्या

    देश में आदिवासियों की आबादी करीब 10 करोड़ है. इसमें इनकी आबादी सिक्किम में 33.8 फ़ीसदी, मणिपुर में 35.1, त्रिपुरा में 31.8, छत्तीसगढ़ में 30.6 प्रतिशत, झारखंड में 26.2, ओडिशा में 22.8, मध्य प्रदेश में 20, बिहार में 15, गुजरात में 15, राजस्थान में 13.48, महाराष्ट्र में 9 और पश्चिम बंगाल में 5.8 प्रतिशत है. इसके अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय, दादर एवं नागर हवेली और लक्षद्वीप में भी इनकी जनसंख्या अच्छी-खासी है.

     


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