यदि कम उम्र में ही नहीं दिया अपनी नन्ही बिटिया के खानपान पर ध्यान, तो 7-8 साल की उम्र में ही आने लगेंगे पीरियड्स, जानें वजह


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):पीरियड्स हर लड़की और महिला के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.इसकी वजह से ही महिला की पहचान महिला के तौर पर होती है. आमतौर पर पीरियड्स आने के सही समय 12 साल या इससे अधिक है लेकिन आजकल के खराब लाइफस्टाइल और खानापान की वजह से बच्चियों को 8 से 9 साल के बीच ही पीरियड्स आ रहे है. ऐसे में इसके पीछे की चौंकने वाली वजह जानना काफी जरूरी है.यदि आप भी एक बेटी की मां हैं तो आपकी बच्ची को कम उम्र में ही इन बातों पर ध्यान देना होगा वरना उसके साथ भी यह समस्या हो सकती है.
कम उम्र में ही आ रहे हैं पीरियड्स
आपको बताएं कि अर्ली ऐज पीरियड आजकल की बच्चियों में काफी ज्यादा देखने को मिल रही है. जहां 8 से 9 साल की बच्चियां अब पीरियड्स होती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन द्वारा किये गए सर्वे के अनुसार पहली बार पीरियड आने का सही उम्र 12 साल और इससे अधिक को माना गया है.लेकिन आजकल के खराब रहन-सहन और केमिकल युक्त प्रोडक्ट के इस्तेमाल और फैट वाले खाने से बच्चियों के अंदर फैट जमा हो रहे है जिसकी वजह से जल्दी पीरियड्स हो रही है.
स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा बुरा
आपको बता दें कि इस तरह से कम उम्र में बच्चियों के पीरियड्स आना उनके स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा बुरा है.इसकी वजह से उनकी हाईट तो प्रभावित होती ही है, साथ में उन्हें मानसिक परेशानी भी होती है, इसके साथ ही भविष्य में जाकर उनके साथ कई तरह की परेशानियाँ होने लगती है.भले ही बच्चियों में कम उमर में पीरियड्स हो रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पीरियड आने के बाद ओव्यूलेशन होगा.जब उनकी उम्र 12 साल या उससे ज्यादा होगी तब ही वह वैल्यूएशन करेंगी.जब पीरियड्स रेगुलर हो जाएंगे.
ये है असली वजह
ऐसे में अगर आप भी एक बच्चे के माता-पिता है तो आपको इसके पीछे की वजह जरूर जानी चाहिए ताकि आप अपने बच्चियों के साथ ऐसा होने से रोक सकें.दरअसल आजकल लोग फैट वाले खाना यानी प्रोसेसिंग पैकेजिंग फूड्स को काफी ज्यादा महत्तव देते है और बच्चों को रेस्टोरेंट में ले जाकर पिज्जा,बर्गर खिलाते है जिसकी वजह से छोटी बच्चियों के शरीर में फैट जमा होता है जमे फैट बॉडी में एस्ट्रोजन की मात्रा को बढ़ा देते है.जिसकी वजह से बच्चों को जल्दी पीरियड्स आते है.
ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
आजकल लोग खुद को अमीर और रहीस दिखाने के लिए छोटे बच्चों के ऊपर महंगे-महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते है जिनमे तेल, शैम्पू और बॉडी लोशन आदि शामिल होता है.ब्यूटी प्रोडक्ट्स में केमिकल होता है, जो बच्चियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. यह केमिकल शरीर में जिनोएस्ट्रोजन को बढ़ा देते है इसकी वजह से भी बच्चियों में जल्दी पीरियड्स की समस्या हो जाती है.
मानसिक तनाव
कम उम्र में पीरियड्स की समस्या, मानसिक तनाव की वजह से भी होते है. डॉक्टरों का मनाना है कि घर में जब तनावपूर्ण माहौल होता है तो बच्चियों के अंदर तनाव पैदा होता है. तनाव का असर बच्चियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता उनके पीरियड्स आने लगते है.एक अध्ययन में पाया गया है कि 3 से 5 साल के बच्चे प्राकृतिक भोजन की की जगह प्रसंस्कृत खाने का सेवन ज्यादा कर रहे है जिसकी वजह से भी बच्चों के अंदर यह समस्या आ रही है.
कई गंभीर बिमारियों को देता है जन्म
कम उम्र में पीरियड्स की वजह से बच्चियों में मोटापा की बीमारी, डायबिटीज, दिल से जुड़ी समस्या या कैंसर तक का खास खतरा बढ़ जाता है.यदि इस पर ध्यान ना दिया जाए तो आगे चलकर आपकी बेटी कभी भी एक स्वस्थ महिला नहीं बन पायेगी.इसलीए समय रहते अपने बच्चियों के रहन-सहन और खान-पान का ध्यान दें.
शारीरिक रूप से सक्रिय रखें
यदि आप चाहती हैं कि आपकी बेटी कम उम्र में इस समस्या का शिकार ना हो तो सबसे पहले उसको शारीरिक रूप से सक्रिय रखें यानी बच्चियों को मैदान में या घर के बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें.आजकल के बच्चे घर में ही रहना पसंद करते है और फोन ज्यादा इस्तेमाल करते है इससे भी वह फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पाते है जिसकी वजह से उनके अंदर यह सारी समस्याएं उत्पन्न होती है.
प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग करें
इसके साथ ही कम उम्र की बच्चियों पर कभी भी ब्यूटी प्रोडक्ट शैंपू, साबुन, बॉडी लोशन आदि का उपयोग करने की जगह प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग करें ताकि उनके स्वास्थ्य पर कोई भी बुरा असर न पड़े.
प्रोसेसिंग फूड खाने और फ़ैट वाले खाने को देने से बचे
छोटे बच्चों को कभी भी पैकेजिंग या प्रोसेसिंग फूड खाने और फ़ैट वाले खाने को देने से बचे.इसकी जगह आप भर भरकर फल, हरी सब्जियां दूध, दही आदि बच्चियों दे सकते हैं इसे उनके मानसिक विकास के साथ शारीरिक विकास होगा और इस समस्या से भी छुटकारा मिलेगा.
मानसिक तनाव से रखे दूर
आप अपने बच्चियों को घर में एक स्वस्थ पर्यावरण दें. बच्चों की मानसिक रूप से किसी तरह का कोई तनाव ना हो इन छोटी-छोटी कोशिशों से आप अपने बच्चियों की जिंदगी की सुरक्षित कर सकते है.
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