झारखंड में बरसात के समय कैसा चल रहा नक्सल अभियान! क्या है अब आगे की रणनीति, जानिए सारंडा के जंगल में क्या चल रहा

    झारखंड में बरसात के समय कैसा चल रहा नक्सल अभियान! क्या है अब आगे की रणनीति, जानिए सारंडा के जंगल में क्या चल रहा

    रांची(RANCHI): झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ अभियान बीते कई सालों से चलाया जा रहा है. इस बीच अब बरसात का मौसम शुरू हो गया. ऐसे में जंगल में अभियान अभी कैसा चल रहा है. आखिर सुरक्षाबल के जवान कहाँ तक पहुँच गए है और जंगल में फिलहाल कितने माओवादी बचे है. जिसे टारगेट कर जवान आगे बढ़ रहे है. साथ ही बरसात के समय कौन सी चुनौती  जवानों के सामने है. इस खबर में सभी जानकारी देंगे. आखिर नक्सलियों का खात्मा कब होगा.

    सबसे पहले सारंडा के जंगल को जानना बेहद जरूरी है. बरसात के समय जंगल में रहना काफ़ी खतरनाक है. यह पुरा इलाका जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है.जितना ज्यादा पेड़ पौधे है आसमानी बिजली का खतरा भी उतना ही अधिक है. हाल में अभियान के दौरान आसमानी बिजली भी गिरी जिससे एक CRPF के अधिकारी की शहादत हुई. इस बीच अब आखिर अभियान में क्या बदलाव किया गया है और कैसे पूरे अभियान को चलाया जा रहा है यह जान लेना बेहद जरूरी है.

    सारंडा के जंगल में चल रहे नक्सल अभियान की मोनेटरिंग पुलिस मुख्यालय से की जा रही है. सीधा कनेक्शन अधिकारी मुख्यालय से रखते है. इस बीच अब अभियान में मौसम विभाग की भी बड़ी भूमिका हो गई है. मौसम के पूर्व अनुमान के मुताबिक जंगल में अभियान चलाया जा रहा है. जब आसमानी बिजली का अलर्ट होता है तो ऐसे में सभी जवानों को सूचना दे दी जाती है. जिससे सभी जवान सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाए. यह जानकारी अभियान में बड़ी कारगर साबित होती है. वैसे तो बरसात के समय जंगल में कई चुनौती है. एक तो आसमानी बिजली दूसरा जंगल में सांप का भी खतरा बना रहता है. इसके बावजूद नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है. इस जंगल में छुप कर बैठे नक्सलियों को सीधे टारगेट किया जा रहा है. पुलिस सारंडा के जंगल को चारों तरफ से घेर चुकी है और घेर कर ढेर करने की तैयारी में है.

    इस जंगल में अभियान पर अभियान आईजी माइकल एस राज ने बताया है कि किसी भी कीमत पर अभियान ना रोका जाएगा और ना ही धीमा होने वाला है. जंगल में जाबाज जवान मोर्चा संभाल कर डटे हुए है. अब नक्सलियों के खात्मे के बाद ही सुरक्षाबल के जवान वापस लौटेंगे. अगर देखे तो अभियान तेज है. इस दौरान कई बड़ी सफलता भी सुरक्षाबल के जवानों को मिली है. कई बंकर को ध्वस्त कर दिया. नक्सल समान को जब्त कर लिया. जिसे नक्सली अपने लिए सेफ जोन मान कर चल रहे थे. लेकिन यही उनके लिए काल बन गया.

    इस जंगल में एक करोड़ के इनामी तीन नक्सली है. मिसिर बेसरा,एनल दा और आकाश दा. यह तीनों झारखंड में नक्सलवाद के जनक माने जाते है. इनाम की राशि से ही समझ जा सकता है कि यह कितना खतरनाक है. पुलिस का दावा है कि इस जंगल में ही तीनों का दस्ता मौजूद है. जिसे ढेर कर नक्सलवाद का खात्मा करेंगे.                                                             


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