आखिर कैसे बनती है शहर की सरकार? जानिए क्या है निकाय चुनाव...


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज अगर झारखंड में किसी चीज सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वो है नगर निकाय चुनाव. राज्य में मार्च से पहले यानि कि फ़रवरी में नगर निकाय चुनाव होने हैं और अब उसकी तैयारियां ज़ोरों पर हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह कन्फ़्युशन राहत है की आखिर नगर निकाय चुनाव होते क्या हैं और नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका में क्या नतार है. अगर आपके भी ज़हन में इस तरह के सवाल आते हैं तो आज की ये खबर आपके बड़े काम की है. यहाँ हम आपको विस्तार से बताएंगे की आखिर यह इकाई क्या होती है, यह कैसे काम करती है और यह क्या काम करती है.
किसी भी राज्य में प्रशासन की सबसे निचली इकाई स्थानीय शासन कहलाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (तालुका/प्रखंड) और जिला परिषद के रूप में काम करती है, वहीं शहरी इलाकों में यही व्यवस्था नगर निकाय के रूप में जानी जाती है.
भारत के संविधान के 73वें और 74वें संशोधन ने स्थानीय शासन को संवैधानिक मजबूती दी, जहां 73वां संशोधन (1993) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन से संबंधित है और 74वां संशोधन (1993) शहरी स्थानीय स्वशासन यानी नगर निकायों से संबंधित है. इन्हीं संशोधनों के तहत झारखंड सहित पूरे देश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत की व्यवस्था लागू है.
झारखंड में किसी क्षेत्र को नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत घोषित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है. यह निर्णय झारखंड नगर पालिका अधिनियम, 2000 की धारा 4 के तहत लिया जाता है.
झारखंड में कैसी है निकाय चुनाव व्यवस्था
झारखंड में निकाय चुनाव शहरी क्षेत्रों में कराए जाते हैं. किसी क्षेत्र को शहरी निकाय घोषित करने के लिए कुछ बुनियादी मानदंड हैं जिसके जरिए क्षेत्रों को बाटा जाता है. शहरों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है—
1. नगर निगम (Municipal Corporation)
बड़े और अधिक आबादी वाले शहर इस श्रेणी में आते हैं जहां आमतौर पर 2 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों को नगर निगम घोषित किया जाता है.
झारखंड में कुल 9 नगर निगम हैं
• आदित्यपुर
• चास
• देवघर
• धनबाद
• गिरिडीह
• हजारीबाग
• मानगो
• मेदिनीनगर
• रांची
2. नगर परिषद (Municipal Council / Nagar Parishad)
यह मध्यम आकार के शहरों की इकाई होती है, जहां लगभग 40 हजार से 2 लाख आबादी वाले शहर इस श्रेणी में आते हैं. झारखंड में कुल 20 नगर परिषद हैं, जिनमें शामिल हैं
• बिश्रामपुर नगर परिषद
• चाईबासा नगर परिषद
• चक्रधरपुर नगर परिषद
• चतरा नगर परिषद
• चिरकुंडा नगर परिषद
• दुमका नगर परिषद
• गढ़वा नगर परिषद
• गोड्डा नगर परिषद
• गुमला नगर परिषद
• झुमरीतिलैया नगर परिषद
• जुगसलाई नगर परिषद
• कपाली नगर परिषद
• लोहरदगा नगर परिषद
• मधुपुर नगर परिषद
• मिहिजाम नगर परिषद
• पाकुड़ नगर परिषद
• फुसरो नगर परिषद
• रामगढ़ नगर परिषद
• साहिबगंज नगर परिषद
• सिमडेगा नगर परिषद
3. नगर पंचायत / नगर पालिका
यह छोटे कस्बों और ग्रामीण से शहरी संक्रमण वाले क्षेत्रों के लिए, जहां आमतौर पर 12 हजार से 40 हजार आबादी वाले क्षेत्र इस श्रेणी में आते हैं. झारखंड में कुल 20 नगर पंचायतें हैं, जिनमें शामिल हैं
• बचरा नगर पंचायत
• बड़की सरैया नगर पंचायत
• बरहरवा नगर पंचायत
• बासुकीनाथ नगर पंचायत
• बुंडू नगर पंचायत
• चकुलिया नगर पंचायत
• छतरपुर नगर पंचायत
• धनवार नगर पंचायत
• डोमचांच नगर पंचायत
• हरिहरगंज नगर पंचायत
• हुसैनाबाद नगर पंचायत
• जामताड़ा नगर पंचायत
• खूंटी नगर पंचायत
• कोडरमा नगर पंचायत
• लातेहार नगर पंचायत
• महागामा नगर पंचायत
• मंझियावां नगर पंचायत
• नगर उत्तरी नगर पंचायत
• राजमहल नगर पंचायत
• सरायकेला नगर पंचायत
झारखंड में कैसे होते हैं शहरी निकाय चुनाव
शहरी निकाय चुनाव वार्ड प्रणाली के तहत होते हैं.
• शहर को छोटे-छोटे वार्डों में बांटा जाता है
• हर वार्ड से जनता एक पार्षद (Councillor) चुनती है
• चुने गए पार्षद मिलकर मेयर या अध्यक्ष का चयन करते हैं
नगर निगम, परिषद और पंचायत के मुख्य कार्य
झारखंड के सभी शहरी निकायों की जिम्मेदारियां लगभग समान होती हैं—
• साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन
• पेयजल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था
• सड़कें, पुलिया, स्ट्रीट लाइट और यातायात प्रबंधन
• सामाजिक कल्याण योजनाएं
• छोटे और लघु उद्योगों को बढ़ावा
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