झारखंड झारखंडियों का तो एमपी-एमएलए बाहरी कैसे ! 2024 के संग्राम से पहले टाइगर जयराम का महासंग्राम, निशाने पर कांग्रेस -भाजपा

    झारखंड झारखंडियों का तो एमपी-एमएलए बाहरी कैसे ! 2024 के संग्राम से पहले टाइगर जयराम का महासंग्राम, निशाने पर कांग्रेस -भाजपा

    Ranchi- जैसे जैसे लोकसभा का चुनाव नजदीक आता दिख रहा है, टाइगर जयराम बेहद सधे अंदाज में बाहरी भीतरी संघर्ष को हवा देकर अपनी सियासी जमीन को मजबूती प्रदान करते दिख रहे हैं. अपनी चुनावी सभाओं में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे, धनबाद सांसद पीएन सिंह, पलामू सांसद बीडी राम, चतरा सांसद सुनील सिंह, हजारीबाग सांसद जयन्त सिन्हा पर निशाना साधते हुए वह इस सवाल को खड़ा कर रहे हैं कि क्या हम झारखंडी जीवन पर भीड़ का हिस्सा बनने के लिए पैदा हुए हैं. हम इन सांसदों को क्यों ढोयें, अकेला यादव, समरीलाल और दूसरे उन विधायकों को क्यों बर्दाश्स्त करें जो बिहार-राजस्थान से आकर यहां राजनीति की दुकान चला रहे हैं.

    यूपी बिहार के लोगों को झारखंड में सांसदी विधायकी और हमारे लोगों के हिस्से कुल्लीगीरी

    जयराम महतो इस सवाल को उछाल रहे हैं कि एक तरफ हमारे लोग, झारखंड के आदिवासी-मूलवासी कुल्ली की नौकरी  के लिए मुम्बई की सड़कों की खाक छान रहे हैं. प्रवासी का तमगा लिये महानगरों में दो जुन की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. तो दूसरी ओर यूपी बिहार से कुछ लोग चलकर यहां आते हैं, और उन्हे राजनीतिक पार्टियों के द्वारा सांसद विधायक का टिकट देकर सम्मानित किया जाता है. हमें इस राजनीति को बदलना होगा.

    राजनीति चेतना के अभाव के कारण बनी यह स्थिति

    जयराम महतो ने कहा यह स्थिति इसलिए आयी, क्योंकि हमारे लोगों में उस राजनीतिक सामाजिक चेतना का अभाव है, जिसके बूते यूपी बिहार और राजस्थान के लोग झारखंड में सासंद विधायक बनते हैं. हमे अपने लोगों को राजनीतिक रुप से जागरुक बनाना होगा, यह महज एक चुनाव की बात नहीं है, चुनाव दर चुनाव हमें इस लड़ाई को लड़ना होगा. तब ही हमारी किस्मत का बंद ताला खुलेगा

    चुनिंदा लोकसभा क्षेत्रों में अपनी शक्ति प्रर्दशन कर चुनावी राजनीति का आगाज करना चाहते हैं जयराम

    जिस प्रकार से हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, गिरिडीह और धनबाद लोकसभा क्षेत्रों में जयराम महतो की सक्रियता है, उससे इस आकलन को बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में उनकी कोशिश अपनी ताकत को महज पांच लोकसभा क्षेत्रों में ही केन्द्रीत करने की है. हालांकि खुद जयराम महतो किस लोकसभा से चुनावी जंग का एलान करेंगे इस पर अभी संशय बरकरार है. लेकिन इतना साफ है कि वह अपनी क्षमता और संसाधनों को देखते हुए नपे तुले अंदाज में चुनिंदा लोकसभा क्षेत्रों से ही चुनावी राजनीति का आगाज करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.


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