1 रुपये में यहां बच्चों को मिल रही है शिक्षा, दिहाड़ी मजदूर बना बच्चों का फरिश्ता


टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : कुछ कहानी ऐसी होती है जो लोगों को एक प्रेरणा दे जाती है. जिससे आपको काफी कुछ सीखने को मिलता है. व्यक्ति की जिम्मेवारी उसके घर तक ही नहीं बल्कि समाज के प्रति भी होती है. लोग सिर्फ खुद के लिए कुछ करने, सोचने और समझने में अपना जीवन बिता देते है. मगर बहुत कम लोग ही हैं जो अपने को पीछे रख समाज के लिए योगदान देते हैं. एक ऐसी ही कहानी हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं. जहां एक व्यक्ति ने गरीब बच्चों के लिए 1 रुपये वाली पाठशाला खोली है. जिसमें उन्हें बेहतर शिक्षा भी दी जा रही है.
फरिश्ता बनकर आया ये युवक
कोलकाता से करीब 90 किलोमीटर दूरी पर एक देउलबाड़ी गांव है. जहां तकरीबन 100 परिवार रहते हैं. इस गांव में ना बिजली है और ना ही शिक्षा. स्थिति ऐसी है कि यहां उनकी बेहतरीन शिक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है. प्रशासन की नजर इन पर नहीं है ना ही उनकी समस्या दूर करने वाला कोई है. गांव के ही 25 वर्षीय युवक पुलक मंडल उनके लिए फरिश्ता बन कर आया है. जिसमें इन सभी बच्चों की समस्या दूर कर दी है. इस युवक ने गांव में ही एक रुपए वाली पाठशाला खोली है. इसके बाद अब इन सभी बच्चों का भविष्य सुधरता दिख रहा है.
एक बार तूफान में ढहा स्कूल
पुलक मंडल के मन में यह विद्यालय बनाने का ख्याल तब आया जब उसने लॉकडाउन के समय स्कूल बंद होने से बच्चों को इधर-उधर घूमते देखा. बिना शिक्षा के वह पूरा साल काट रहे थे इसके बाद ही युवक ने यह पहल की. बता दे कि पुलक ने साल 2017 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह कॉलेज में दाखिला नहीं ले सका. जिसके बाद वह कोलकाता में राजमिस्त्री का काम करने लगा. इस दौरान कोविड आ गया और सब कुछ बदल गया. युवक की नौकरी छूट गई और वह अपने गांव वापस लौट गया पहले तो उसने यहां बच्चों को शिक्षा की सामग्री प्रदान दी. जिसके बाद उसने एक पाठशाला खोली मगर अचानक तेज तूफान के कारण वह पाठशाला ढह गया. इसके बावजूद युवक ने हार नहीं मानी उसने अपनी ई रिक्शा को बेचकर एक पाठशाला खोली. जिसमें बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं.
रोजाना पढ़ाते हैं 4 शिक्षक
इस पाठशाला में कुल 46 बच्चे हैं. जो 1 रुपए में एक अच्छी शिक्षा पा रहे हैं. यहां तकरीबन चार टीचर रोजाना क्लास लेते हैं. डेली बच्चे यहां मात्र 1 रुपए लेकर आते हैं और शिक्षा प्राप्त करते है. सुबह 6:30 बजे से लेकर 9:00 बजे तक कक्षा एक से चार की पढ़ाई होती है. अब इस विद्यालय की मदद से बच्चों की शिक्षा नहीं रुक रही है. इस गाव में पुलक की काफी चर्चा है. हर कोई इस बेहतरीन पहल की सरहाना कर रहा है.
4+