कभी सुरक्षाबलों को देखते ही मारते थे गोली, अब बता रहें दोस्त, चिट्टी लिखकर की शांति वार्ता की अपील कर रहें माओवादी

    कभी सुरक्षाबलों को देखते ही मारते थे गोली, अब बता रहें दोस्त, चिट्टी लिखकर की शांति वार्ता की अपील कर रहें माओवादी

    रांची (RANCHI): देश में कभी हथियार के बल पर सत्ता अपने का सपना देखने वाले नक्सली अब घुटने पर आ गए हैं. बढ़ते पुलिसिया दबिश से अब शांति वार्ता की अपील कर रहे हैं. साथ ही पुलिस को अपना दोस्त बता रहे हैं. इस पत्र से देश में खलबली मच गई है. आखिर जो उग्रवादी हथियार से बात कर रहे थे वह इतने सॉफ्ट कैसे हो गए. दरअसल छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड तक नक्सलियों के खात्मे का प्लान तैयार कर सुरक्षा बल अंजाम तक पहुंचने में लगे हैं, लेकिन इस बीच एक पत्र उत्तर पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से जारी किया गया है. पत्र में लाल अक्षरों में लिखा गया शांति वार्ता के लिए हम तैयार हैं अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है

    जंगल में अभियान में लगे सुरक्षा बल के जवानों को कहा हम आपस में लड़ रहे हैं यह सही नहीं है. हमारी दुश्मनी पुलिस से कभी नहीं थी. आपको भी इस पर सोचना होगा. कई बार प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है. पुलिस को कभी भी हम दुश्मन के तौर पर नहीं देखते हैं. यह बात समझनी होगी आपस में लड़ने की स्थिति पैदा हो गई है. शांति वार्ता का हमारा प्रयास का समर्थन करें.  जनता और हमारे कैडर अपने ही लोग हैं हम पर गोली मत चलाएं.

    पत्र में कहा गया है कि शांति वार्ता हमारे सीसी यानि सेंट्रल कमिटी/SZC यानि सब जॉनल कमिटी के दायरे का विषय है. इन कमेटी को मीडिया में आए समाचारों को देखना और तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देने में कई तकनीकी अड़चन है. सुरक्षा कारणों से हमारे उच्च कमिटी की तरफ से तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे पाने की स्थिति बनी हुई है. हमारे सीसी द्वारा वार्ता के लिए पेशकश को आगे बढ़ाने की प्रयास के रूप में इस पत्र को देखना है. इस पत्र या वार्ता का पेशकश का मुख्य उद्देश्य बस्तर में हो रहे हत्याकांड का होना है.

    वार्ता के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है, जिससे वार्ता सफल हो और यह युद्ध रुक सके. जिससे सार्थक माहौल बने. सरकार की तरफ से इसका सकारात्मक संदेश मिलते ही उसे पर काम शुरू करेंगे. आगे यह भी बताया गया कि जो लगातार एनकाउंटर हो रहे हैं, उससे इलाकों में दहशत का माहौल है. युवा पलायन करने को मजबूर है. यह सब ध्यान में रखकर सरकार को कदम उठाना चाहिए.

    शांति बहाल करने की दिशा में अन्य कई लोगों का समर्थन भी माओवादियों ने मांगा है. जनवादी प्रेमियों बुद्धिजीवियों, मानव अधिकार संगठन, सामाजिक संगठन और अन्य कार्यकर्ता, जन पक्षधर पत्रकार से अपील की है कि वह दिशा में सार्थक पहल करें.

    बता दें कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में लगातार नक्सलियों के खात्मे को लेकर विशेष प्लान तैयार कर काम जारी है. उसमें कई बड़ी सफलता सुरक्षा बल के जवानों को मिली हा. कभी 38 से 40 नक्सलियों को मार गिराया तो कभी 15 से 20. पहले छत्तीसगढ़ में देखने को मिलता था कि बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों को टारगेट करके शहीद करते थे लेकिन अब नक्सली बैकफुट पर है और पत्र लिखकर अपने रहम की भीख मांग रहे हैं.

    रिपोर्ट-समीर


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