डुमरी उपचुनाव बीजेपी के लिए कड़ा इम्तहान, तो जेएमएम को अपनी जीत पर एतबार, जानिए क्या है चुनाव का गणित

    डुमरी उपचुनाव बीजेपी के लिए कड़ा इम्तहान, तो जेएमएम को अपनी जीत पर एतबार, जानिए क्या है चुनाव का गणित

    टीएनपी (TNP DESK):- डुमरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने वाला है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दिवंगत जगरनाथ महतों की वाइफ बेबी देवी को मंत्री बनाकर प्रत्याशी की किचकिच तो तकरीबन खत्म ही कर दी है. डुमरी उपचुनाव झारखंड का छठा उपचुनाव होगा, इसे लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कमर कस चुके हैं. और हाल ही में डुमरी दौरे पर स्कूल और अस्पताल की सौगात दे चुके हैं . हाल में रामगढ़ में आजसू की जीत के बाद जेएमएम यह समझने लगी है कि , डुमरी का उपचुनाव सिर्फ साहनुभूति की लहर के बूते तो नहीं जीता जा सकता. क्योंकि चुनाव की जीत हालात , मुद्दे औऱ वोटर के मिजाज पर निर्भर रहता है.

    बीजेपी के लिए कड़ा इम्तहान    

    डुमरी उपचुनाव का टेस्ट भारतीय जनता पार्टी पास करना चाहेगी. उसके लिए यह एक इम्तहान औऱ अग्निपरीक्षा सरीखा होगा . वैसे अभी तक हुए पांच उपचुनाव में सिर्फ रामगढ़ सीट पर ही बीजेपी से समर्थित आजसू जीती थी. बाकी चार सीटों पर महागठबंधन यानि यूपीए ने जीत दर्ज की . हालांकि, पांचों सीट जिन पर चुनाव हुए, वो यूपीए की ही थी. जहां एक रामगढ़ सीट एनडीए ने झटक लिया . इसबार भी कुछ ऐसा ही समीकरण भारतीय जनता पार्टी डुमरी उपचुनाव में बैठाने की कवायद में होगी.  उसकी कोशिश रामगढ़ की तरह डुमरी जीतने की भी होगी .

    बीजेपी और आजसू ने लड़ा था अलग-अलग चुनाव

    अगर देखा जाए तो डुमरी के पिछले चुनाव में बीजेपी और आजसु अलग-अलग लड़ी थी. जिसका खामियाजा भी दोनों को भुगतना पड़ा था . दिवंगत जगरनाथ महतो 71 हजार 128 वोट लाए थे औऱ एकतरफा जीत हासिल की थी. आजसू की यशोदा देवी 36 हजार 840 वोट ही ला सकी थी. जबकि , बीजेपी ने प्रदीप साहू को मैदान में उतारा था, उन्होंने करीब 36 हजार 013 वोट लाया था . यानि आजसू के मुकाबले बीजेपी को महज 800 कम वोट मिले थे . अगर पिछले चुनाव में बीजेपी औऱ आजसू साथ-साथ लड़ते तो रिजल्ट कुछ और हो सकता था , क्योंकि दोनों के वोट मिलाए तो जेएमएम से ज्यादा थे. वैसे भाजपा समझ चुकी है कि अकेले झारखंड में जीतना उतना आसान नहीं है . लिहाजा, रामगढ़ की तरह इस सीट पर भी त्याग कर सकती है. अगर वह आजसू को ही समर्थन दे तो फिर शायद उपचुनाव का समीरकऱण पलट सकता है .  हालांकि, जो वक्त की नजाकत है औऱ लोकसभा चुनाव की जो आहट औऱ सरगर्मी है. इसे देखते हुए बीजेपी हर कदम बड़ी सोच-समझकर और कदम फूंक-फूंककर ही रखेगी. झारखंड बीजेपी के नये अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के लिए भी ये चुनाव उनकी निगेहबाजी में चुनौती वाला ही होगा. अगर जीत मिली तो उनकी शुरुआत अच्छी मानी जाएगी.

    डुमारी उपचुनाव में जेएमएम की तैयारी

    दिवंगत जगरनाथ महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक कद्दावर नेता थे. डुमरी में उनका दबदबा , पहचान औऱ अपना वोट बैंक रहा है. इसका फायदा झारखंड सरकार में मंत्री बनीं वाइफ बेबी देवी को मिलेगा. इसके साथ ही बेबी देवी को मंत्री बनाकर एक तरह से जेएमएम आलाकमान ने डुमरी की जनता को पहले ही सौगात दे दिया है. वैसे उपचुनाव में अगर बीजेपी और आजसू मिलकर लड़ते हैं, तो टक्कर देखने को मिल सकती है. हालांकि, साहनुभूति की लहर और जनता के मन में दिवंगत नेता की छवि भी ताजा रहेगी. लिहाजा, डुमरी के उपचुनाव में एनडीए के मुकाबले जेएमएम का पलड़ा भारी रहेगा, इसमे संदेह नहीं किया जा सकता. बाकी चुनाव के परिणाम आने के बाद ही तय होगा कि आखिर डुमरी का विधायक कौन है.

    रिपोर्ट-शिवपूजन सिंह


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