किसके प्रभाव से शनिदेव हुए लंगड़े, जानें शनिदेव से जुड़ी प्रचलित कहानियां  

    किसके प्रभाव से शनिदेव हुए लंगड़े, जानें शनिदेव से जुड़ी प्रचलित कहानियां   

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): लोगों में अज्ञानता की वजह से शनिदेव को क्रूरता का देवता माना जाता है. और उन्हें कुछ लोग अशुभ और दुख का कारक मानते हैं. लेकिन शनिदेव की महिमा बहुत अपार है. जिस पर भी उनकी कृपा होती है. वो धन-धान्य से पूर्ण हो जाता है. शनि भगवान को लेकर समाज में अलग-अलग कहानियां फैली हुई है. लेकिन आज हम आपको शनिदेव की महिमा के बारे में बतायेंगे कि वो उतना अशुभ और क्रूर नहीं है. जितना उन्हें माना जाता है.

    इस तरह हुआ था शनिदेव का जन्म

    पहले बता दिं कि शनिदेव का जन्म कैसे हुआ था. पुरानी कथाओं की माने तो भगवान सूर्यनारायण की पत्नी की कई सालों तक संतान नहीं हुई. जिसके बाद वह भगवान शिव से पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या करने लगी. तब भगवान शिव ने छाया की तपस्या से खुश होकर उन्हें पुत्र होने का वरदान दिया. जेष्ठ माह की अमावस्या के दिन भगवान शनि का जन्म हुआ. लेकिन तेज गर्मी और धूप की वजह से भगवान शनि देव का रंग काला हो गया.

    पिता सूर्य के प्रति शनिदेव रखते हैं शत्रुता की भावना

    एक  दिन भगवान सूर्य अपनी पत्नी छाया से मिलने आए. सूर्य के तेज को शनि देव बर्दाश्त नहीं कर पायें और अपनी आंखें बंद कर ली. जब सूर्य ने शनिदेव के काले रंग को देखा तो उन्होंने शनिदेव को अपनाने से मना कर दिया. और पत्नी छाया पर संदेह करने लगे. और कहा कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता. इसके बाद शनिदेव के मन में पिता के लिए दुश्मनों वाला भाव पैदा हो गया.

    अपने पिता से भी ताकतवर होना चाहते थे शनिदेव

    जब से शनि देव का जन्म हुआ था, तब से उन्होंने कभी भी अपने माता-पिता को प्यार से रहते नहीं देखा था. उनके पिता उनकी माता को हमेशा प्रताड़ित और अपमानित करते थे. इसलिए वह अपने पिता से भी ज्यादा ताकतवर होने के लिए भगवान शंकर की तपस्या शुरु कर दी.

    शिवजी ने दिया था नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर होने का वरदान

    शनिदेव की कड़ी तपस्या से शिवजी प्रसन्न होकर शनिदेव से वरदान मांगने को कहा, तो शनिदेव ने अपने पिता सूर्य से भी ज्यादा ताकतवर होने का वरदान मांगा. तब भगवान शिव ने सनी भगवान को नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर होने का  वरदान दिया. साथ ही न्यायाधीश भी बनाया. ताकि मानव ही नहीं असुर भी इनसे भयभीत रहे.

    गरीबों के अत्याचार पर क्रोधित होते हैं शनिदेव

    शनिदेव को सबसे क्रोधित देवता माना जाता है. जब भी कोई इंसान गरीब लोगों पर अत्याचार करता है, या फालतू में किसी की बेईज्जी या अपमान करता है. तो शनि महाराज क्रोध में आ जाते हैं. और अपने प्रतिकूल प्रभाव से लोगों को दंडित करते हैं. जो लगभग साढ़े सात साल का होता है. शनिदेव के इस प्रभाव को साढ़े साती कहा जाता है. इस ग्रह के चढ़ते ही व्यक्ति के जीवन में परेशानियों का आगमान होता है. और वो हमेशा परेशान होता रहता है.

    इस वजह से शनिदेव की चाल हुई टेढ़ी

    धार्मिक कथा के अनुसार भगवान शिव के अवतारों में पिप्पलाद भी एक थे. जो भोलेनाथ के बड़े भक्त दधीचि मुनि के पुत्र थे. शंकर जी ने दधीचि मुनि के घर पुत्र के रूप में जन्म लिया था. इनका जन्म पीपल पेड़ के नीचे होने और पीपल के पत्तों को खाकर जन्म लेने की वजह से ब्रह्माजी ने इनका नाम पिप्पलाद रखा. जन्म के बाद ही इनके पिता दधीचि मुनि की मृत्यु हो गई.

    जब बड़े होकर पिप्पलाद को पता चला कि शनिदेव की कुदृष्टि की वजह से उनके पिता की मृत्यु हुई है. तो क्रोधित होकर शनिदेव पर प्रहार किया. इसके डर से शनिदेव तीनों लोकों में भागने के बाद भी नहीं बच पायें. और शस्त्र औकर उनके पैरों पर लग गया. जिससे शनिदेव का पैर टूट गया. और ये लंगड़े हो गये.

    अपने-अपने तरीके से लोग करते है शनिदेव को प्रसन्न 

    वहीं शनि ग्रह से बचने और शनिदेव को खुश करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते हैं. कुछ लोग शनिवार के दिन पीपल पेड़ के नीचे पूजा-पाठ करते हैं तो कुछ लोग दान-पुण्य करते हैं. इसके साथ ही लोग इस दिन खिंचड़ी बनाकर खाते है. जिससे ग्रह कम होते है.

    शनिवार को भुंजा खाने से शनिदेव के प्रतिकूल प्रभाव से बचा जा सकता है

    इसके साथ ही शनिवार को भुंजा खाने से भी शनिदेव के प्रतिकूल प्रभाव से बचा जा सकता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनिवार के दिन खिचड़ी खाने से शनिदेव जहां खुश होते है. तो वहीं काले चने की चावल, चिवड़ा चने का भुजा खाना और काले चने की सब्जी खाना चाहिए. इससे आपके जीवन में शांति और खुशहाली बनी रहती है.

    शनिदेव को काला रंग है अति प्रिय

    शनि महाराज को बहुत जल्दी क्रोध आता है. शनिदेव बुरे कर्म करनेवाले लोगों से जल्दी नाराज होते हैं. इनको खुश करने के लिए भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. क्योंकि शिव शनि देव के गुरु माने जाते हैं. भोलेनाथ ही शनि देव के क्रोध को कम कर सकते हैं. शंकर जी ने ही शनि देव को ब्रह्मांड में कर्म न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी थी. अपने पिता को खुश करने के लिए शनिदेव ने काले तिल से पिता की पूजा की तो वो प्रसन्ने हो गये. शनिदे को काला रंग अति प्रिय है.

    रिपोर्ट-प्रियंका कुमारी

     


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