कांग्रेसियों कर लो भाजपा ज्वाइन, नहीं तो चलने वाला है मामा का बुलडोजर, महेन्द्र सिंह सिसोदिया का विवादित बयान

    कांग्रेसियों कर लो भाजपा ज्वाइन, नहीं तो चलने वाला है मामा का बुलडोजर, महेन्द्र सिंह सिसोदिया का विवादित बयान

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK):  देश के नौ राज्यों में इस वर्ष विधान सभा का चुनाव होना है, इन राज्यों में चुनाव की रणभेरी बचने ही वाली है, सत्ता और विपक्ष के द्वारा इसका शंखनाद किया ही जाने वाला है. लेकिन आप कहें तो इसकी शुरुआत हो भी चुकी है.

    मध्यप्रदेश के पंचायत मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि “सुनों कांग्रेसियों जल्द से जल्द भाजपा ज्वाइन कर लो, नहीं तो मामा का बुलडोजर तुम पर चलने ही वाला है”

    दरअसल महेंद्र सिंह सिसोदिया बीजेपी के पक्ष में एक चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे. इसी दौरान रुठियाई में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “देखो भैया... जो भी कांग्रेसी हो, वह सब धीरे-धीरे करके चुपचाप सरक आओ. क्योंकि 2023 में भी मामा का बुलडोजर तैयार खड़ा है.  

    इसका वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया आ रही है. कुछ लोगों के द्वारा इसे शासन का भाजपा मॉडल बताया जा रहा है, तो कुछ लोगों के द्वारा इसे हिटलरशाही बतायी जा रही है. जबकि नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा है कि सिसोदिया को सत्ता का नशा हो गया है, यदि उनमें इतनी ही हिम्मत तो राधोगढ़ से जयवर्धन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़कर कर दिखायें.

    चुनाव आयोग में शिकायत करेगी कांग्रेस

    यहां यह बता दें कि सिसोदिया ने बुलडोजर वाला यह बयान राघोगढ़ में दिया है, यह इलाका दिग्विजय सिंह का गृह क्षेत्र है. उनके इस बयान के बाद राजनीति गरमा गयी है. काग्रेंस ने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से करने की बात कही है.

    “मैं सिंधिया का चमचा हूं”

    यहां बता दें कि बमोरी विधान सभा सीट से दूसरी बार विधायक चुने गये सिसोदिया को अपने आप को सिंधिया का चमचा कहने में कोई गुरेज नहीं होता है. जनवरी, 2020 में उन्होंने खुलेआम कहा था कि मैं सिंधिया का चमचा हूं और मुझे इस पर गर्व है. 2018 में वे कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते और कमलनाथ सरकार में श्रम मंत्री बनाए गए थे. 2020 में सिंधिया के साथ उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी में चले आए। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में उन्हें पंचायत मंत्री बनाया गया.

    यह अलग बात है कि वह अपनी सरकार पर भी निशाना साधते में नहीं चुकते, कुछ महीने पहले ही उनके द्वारा राज्य के मुख्य सचिव पर निशाना साधा था, तब उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण राज्य का मुख्य सचिव ही है. साथ ही राज्य् में रेत का अवैध कारोबार के लिए अपने ही पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार बताया था.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार


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