“कालीचरण के साथ भगवान बिरसा का आशीर्वाद” खूंटी से सीएम चंपाई की हुंकार, आदिवासी विरोधी है भाजपा

    “कालीचरण के साथ भगवान बिरसा का आशीर्वाद” खूंटी से सीएम चंपाई की हुंकार, आदिवासी विरोधी है भाजपा

    Ranchi-खूंटी संसदीय सीट पर भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और इंडिया गठबंधन की ओर से कालीचरण मुंडा के द्वारा नामांकन के साथ ही भगवान बिरसा की विरासत पर दावेदारी का सियासी संग्राम छिड़ता नजर आने लगा है. जहां भाजपा इस बात का ताल ढोंक रही है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भगवान बिरसा की जन्मभूमि पर जाकर उन्हे माल्यार्पण किया, अपना श्रद्धासुमन सौंपा, उनके वंशजों की पीड़ा सुनी, उनके संघर्षों को समझने की कोशिश की.

    भाजपा के दावे पर सीएम चंपाई का पलटवार

    वहीं भाजपा के इन दावों को नकारते हुए खूंटी के कोऑपरेटिव मैदान से चंपाई सोरेन ने कहा है कि यह झामुमो और महागठबंधन ही है, जो बिरसा के सपनों को पूरा करने के रास्ते पर चल रही है. जिस जल,जंगल और जमीन और आदिवासी-मूलवासी अस्मिता के लिए भगवान बिरसा ने अपनी शहादत दी थी, उलगुलान का सिंहनाद किया था. आज आदिवासी मूलवासियों की उसी जल जंगल और जमीन पर भाजपा की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है. भाजपा के इस लूट को खत्म करना ही आज भगवान बिरसा को असली श्रद्धांजलि है, और उलगुलान को पूरा करने का सही रास्ता है.

    सीएम चंपाई के साथ भगवान बिरसा के वंशज सुखराम की मौजूदगी

    बड़ी बात यह रही है कि जिस मंच से सीएम चंपाई भाजपा के दावों की धज्जियां उड़ा रहे थें. भाजपा और उसकी नीतियों को आदिवासी-मूलवासियों की अस्मिता पर हमला बता रहे थें, भगवान बिरसा का परपोता सुखराम मुंडा भी उसी मंच पर मौजूद थें, जिसके बाद यह माना जा रहा है कि इस बार भगवान बिरसा का पूरा परिवार कालीचरण मुंडा के साथ खड़ा नजर आयेगा, हालांकि अभी मतदान में वक्त है, देखना होगा कि उस वक्त तक सियासी तस्वीर क्या होती है, लेकिन इतना साफ है कि खूंटी के इस सियासी अखाड़े में भगवान बिरसा की इंट्री हो चुकी है, अपनी सुविधा और सियासत के अनुसार भगवान बिरसा का संघर्ष और उनकी शहादत पर दावेदारी तेज हो रही है, जहां भाजपा माल्यार्पण को बड़ा मुद्दा बनाती दिख रही है, वहीं झामुमो का दावा है कि जिस जंगल जमीन और आदिवासी मूलवासी अस्मिता के लिए भगवान बिरसा ने अपनी कुर्बानी दी थी, आज उस सपने को पूरा करने की दिशा में कोई बढ़ रहा है, तो वह झामुमो है, और इसी उलगुलान की कीमत पूर्व सीएम हेमंत को काल कोठरी में बंद होकर चुकानी पड़ रही है. यानि झामुमो की रणनीति पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी कोभगवान बिरसा के शहादत और संघर्ष के साथ जोड़ कर पेश करने की है.

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