BIG BREAKING: सरकार राशनकार्ड धारियों का कार्ड नहीं करे रद्द, राइट टू फूड कैंपेन ने सीएम सोरेन को लिखा सीधा पत्र

    BIG BREAKING: सरकार राशनकार्ड धारियों का कार्ड नहीं करे रद्द, राइट टू फूड कैंपेन ने सीएम सोरेन को लिखा सीधा पत्र

    रांची (RANCHI) : भारत सरकार की ओर से गरीबी रेखा से नीचे आनेवाले लोगों को हर महीने मुफ्त में राशन दिया जाता है, ताकि वह अपना पालन पोषण कर सकें, लेकिन लोगों को सुविधा देने के साथ सरकार की ओर से राशन कार्ड के नियमों में बदलाव किए गए, ताकि इसमे पारदर्शिता बनी रहें. इसी के तहत राशन कार्ड धारियों को 15 जुलाई तक राशन कार्ड का ईकेवाईसी करवाना और राशन कार्ड को आधार से लिंक करने और दस्तावेज जमा करना अनिवार्य किया गया था. दस्तावेज जमा नहीं करने की स्थिति में राशन कार्ड से नाम हटाने का निर्देश दिया गया था. लेकिन अब राइट टू फूड कैंपेन ने झारखंड में राशनकार्ड धारियों के विलोपन पर तत्काल रोक लगाने को लेकर सीएम हेमंत को पत्र लिखा है.

    जिसमें कहा गया है कि जन वितरण प्रणाली के आहार पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर, 14 जुलाई तक राष्ट्रीय और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत 74.6 लाख लोगों का ई-केवाईसी नहीं हुआ है. इसमें से 8.24 लाख राशन कार्डों में एक भी सदस्य का ई-केवाईसी नहीं हुआ है. इससे यह आशंका बढ़ गई है कि लाखों राशन कार्डधारक केवल तकनीकी और व्यवस्थागत समस्याओं के कारण राशन के अधिकार से वंचित रह जाएंगे. ज्ञात हो कि झारखंड में वर्ष 2017 और 2018 में राशन के अभाव में भूख से 17 लोगों की मौत हो गई थी. इतने बड़े पैमाने पर कार्डधारकों का नाम हटाना/रद्द करना लाखों लोगों को भुखमरी और कुपोषण की ओर धकेल सकता है.

    राज्यभर से ईकेवाईसी प्रक्रिया में सामने आ रही गंभीर चुनौतियों की सूचनाएं मिली है, जिनका असर खासतौर पर वृद्ध, दिव्यांग व्यक्ति, प्रवासी मजदूर, बच्चों और दूरदराज के इलाकों में रहने वालों पर पड़ा है. ईकेवाईसी (eKYC) नहीं होने के पीछे कई कारण हैं, मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

    असमर्थ वृद्ध व दिव्यांग : कई कार्डधारी काफी वृद्ध व विकलांगता हैं, जो दूरी और असमर्थता के कारण उचित मूल्य की दुकानों (FPS) तक नहीं पहुंच पायें हैं .

    बायोमेट्रिक विफलताएं: ईपोस (ePOS) मशीनें अक्सर बुज़ुर्गों और मज़दूरों की उंगलियों के निशान दर्ज नहीं कर पातीं. यह एक लंबे समय से चिन्हित समस्या है, जिस पर अब तक समाधान नहीं किया गया .

    आधार की अनुपलब्धता: कई बच्चों के पास आधार नहीं है, या केवल बाल आधार है, जिसमे बायोमेट्रिक का रिकॉर्ड नहीं होता, वे ईकेवाईसी के लिए अपात्र हो जाते हैं.

    कमज़ोर इंटरनेट कनेक्टिविटी: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट की खराब स्थिति के कारण ईकेवाईसी की प्रक्रिया अत्यंत कठिन हुई है. इसके साथ ही 2G ईपोस (ePOS) मशीन में इन्टरनेट की समस्याएँ हैं.

    प्रवासी मजदूरों के लिए चुनौती: बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर ई-केवाईसी पूरा नहीं कर पाए हैं, जिसके पीछे कई तरह की चुनौतियाँ हैं — जैसे कि जानकारी न होना कि ई-केवाईसी कहाँ और कैसे कराना है, दुसरे राज्य के डीलरों द्वारा ई-केवाईसी करने से इनकार, या फिर दुसरे राज्यों में राशन दुकान की जानकारी न होना.

    Mera eKYC App की विफलता- यह एप्प कई तकनिकी कारणों से कार्य नहीं करता. जैसे- आधार का अपडेट न होना, राशनकार्ड डाटाबेस से जानकारी नहीं खोज पाना आदि. इस एप्प में ई-केवाईसी की सफलता दर कम है.

    पात्र हक़धारकों को सुरक्षित रखने के लिए अभियान के तरफ से सरकार को सुझाव

    1. राशन डीलर द्वारा ईकेवाईसी न होने के कारणों का कोडिफाइड सूची के आधार पर सत्यापन कियाजाए.
    2. सत्यापित कारणों को ई.पोस मशीन या ब्लॉक स्तर के ऑपरेटर द्वारा दर्ज किया जाए.
    3. सत्यापन के बाद प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए. कई कारण ऐसे होंगे जो लाभार्थी की पात्रता को उचित ठहराते हैं.
    4. विश्लेषण के आधार पर पात्र लाभार्थियों के नाम विलोपन से सुरक्षित रखे जाएं.
    5. आदिम जनजाति परिवारों को विशेष तौर पर बिना किसी सत्यापन के सुरक्षित रखा जाए.

     


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