'भाभी जी' का 10 साल का नशे का जाल: कम उम्र के युवाओं को बना रही थी शिकार, आख़िर क्या है भाभी जी की सच्चाई ?

    'भाभी जी' का 10 साल का नशे का जाल: कम उम्र के युवाओं को बना रही थी शिकार, आख़िर क्या है भाभी जी की सच्चाई ?

    रांची(RANCHI): राजधानी रांची सहित झारखंड के अन्य जिलों में जिस तरह से ड्रग्स माफियाओं और ब्राउन शुगर का कारोबार फल-फूल रहा है उतना शायद ही किसी और अवैध कारोबार ने तरक्की की होगी. ड्रग्स और ब्राउन शुगर के धीमे जहर ने शहर के पौष से लेकर  आम इलाकों तक को नहीं छोड़ा है. ऐसे में हाल ही में बिहार की ड्रग्स माफिया जो रांची की गलियों में भाभी जी के नाम से मशहूर थी, उनकी रिमांड अब खत्म हो चुकी है और उन्हें अब पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पर सवाल ये है की आखिर ये भाभी जी हैं कौन, जिन्होंने राजधानी की गलियों में रह रहे आम से दिखने वाले नवयुवकों को अपना निशाना बनाया है. दरअसल भाभी जी बिहार के सासाराम की रहने वाली बताई जाती हैं और बिहार की भाभी जी यानि की रूबी देवी न सिर्फ राजधानी रांची बल्कि हजारीबाग, धनबाद, जमशेदपुर, रामगढ़, साथ ही बिहार के मुजफ्फरपुर, पटना, दरभंगा, आरा और यूपी के भी कई जिलों में ब्राउन शुगर की सप्लाइ करती हैं. रूबी देवी का गिरोह ज्यादातर वैसे युवकों को अपना निशान बनाती है जो भोले भाले और कच्ची उम्र के हो. 

    असल में कम उम्र के लड़कों को बरगलाना, और फिर नशे की लत लगाना काफी आसान होता है. जब यह लड़के नशे की लत पकड़ लेते हैं, उसके बाद उनसे भाभी जी अपना कारोबार फैलाना शुरू करती है और उन्हें ड्रग्स पेडलर बना देती हैं. हालिया पूछताछ में रूबी देवी ने ये कबूल किया है की वह और उनका पूरा परिवार पिछले 10 सालों से इस काम में संलिप्त है. साथ ही रूबी देवी उर्फ भाभी जी अपने घर पर ही ब्राउन शुगर तैयार करवाती थी और इस कारोबार में उनका भाई पिंटू, बहनोई प्रिंस और देवर सूरज कुमार भी शामिल थे. बताते चलें की सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

    इस बड़ी कामयाबी के अलावा नशे के कारोबार पर पूरी तरह से नियंत्रण के लिए पुलिस अब ड्रग्स पैडलर के घर वालों की भी काउंसेलिंग करने की तैयारी में है. इसके लिए ड्रग्स पैडलर के घर-घर जाकर पुलिस की टीम नशे से होने वाले नुकसान की जानकारी देगी. बताते चले की पुलिस ने ऐसे करीबन 341 ड्रग्स पैडलरों की सूची तैयारी की है, जो ड्रग्स के मामले में जेल में थे पर अब छूटकर बाहर आ चुके हैं.

    इस अवेयरनेस प्रोग्राम के तहत पुलिस की एक टीम ड्रग्स की तस्करी से जुड़े लोगों के घर जाकर परिजनों के अलावा ड्रग्स पैडलर से भी बातचीत कर उन्हें नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताएगी. साथ ही पुलिस की टीम अब ड्रग्स पैडलर को दूसरे कारोबार में जाने के लिए भी प्रेरित करेगी.


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