2024 के महासमर के पहले बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच एक और रोचक मुकाबला कर रहा है इंतजार, देखिये किसका पलड़ा कितना भारी

    2024 के महासमर के पहले बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच एक और रोचक मुकाबला कर रहा है इंतजार, देखिये किसका पलड़ा कितना भारी

    पटना(PATNA): सी वोटर और इंडिया टूडे ग्रुप के सर्वे के बाद बिहार में भाजपा के अन्दर बेचैनी है. सी वोटर की मानें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबधंन भाजपा को बड़ी शिकस्त देने जा रही है. महागठबंधन की सीटों में 25 गुणा का इजाफा हो सकता है, उसके मतों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

    हालांकि 2024 का महासमर में अभी कुछ महीनों की देरी है, लेकिन उसकी तैयारियां शुरु हो गयी है, पिछले कुछ दिनों में गृह मंत्री अमित शाह का लगातार बिहार दौरा इसकी तस्दीक करता है. लोजपा प्रमुख चिराग पासवान को जेड कैटेगरी सुरक्षा दिया जाना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है.

    विधान परिषद की पांच सीटों के लिए घमासान

    लेकिन 2024 के इस महासमर के पहले भी बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच एक रोचक मुकाबला देखने को मिलने वाला है, वह है बिहार विधान परिषद की पांच सीटों के लिए मुकाबले का. बहुत संभव है कि अप्रैल माह में बिहार विधान परिषद की इन पांच सीटों के लिए चुनाव समन्न करवा दिया जाए, स्वाभाविक है एनडीए और महागबंधन दोनों की कोशिश इन सीटों पर विजय पाने की होगी.

    बिहार विधान परिषद की संरचना

    यहां हम बता दें कि बिहार विधान परिषद की कुल 75 सीटें हैं, इसके अन्दर भी कई कैटगरियां (संवर्ग) है. इन 75 सीटों में विधान सभा की 27 सीटें, स्थानीय निकाय की 24 सीटें, स्नातक निर्वाचण की 6 सीटें, शिक्षक निर्वाचण की 6 सीटें और 12 मनोनित सदस्य होते हैं.

    किसका पलड़ा कितना भारी

    यदि हम आंकड़ों की बात करें तो कुछ महीनों पहले तक यह आंकड़ा साफ तौर पर एनडीए के पक्ष में था, लेकिन नीतीश कुमार के द्वारा राजद के साथ मिलकर सरकार बनाते ही यह पूरी तरह बदल गया.

    यदि हम वर्तमान स्थिति की बात करें तो वर्तमान में भाजपा के पास-23, लोजपा पारस के पास-1 और एक निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है. यानि कुल आंकड़ा होता है 25. जबकि महागठबंधन की बात करें तो जदयू के पास-25, राजद-14, कांग्रेस-4, हम-1, सीपीआई-1 और उन्हे 4 निर्दलीय का समर्थन प्राप्त है, इस प्रकार उनका आंकड़ा है-49, एक सारण की सीट केदार पांडे की मौत के बाद खाली पड़ी है.

    किन-किन सीटों पर होना है मुकाबला

    जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है उसमें सारण की सीट जो केदार पांडे की मौत के बाद खाली हुई है, दो स्नातक की सीट है, इसमें एक है सारण स्नातक निर्वाचण की सीट, यहां से जदयू के बिरेन्द्र नारायण यादव का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, वहीं दूसरी स्नातक की सीट है गया स्नातक क्षेत्र की, यहां से भाजपा के अवधेश नारायण सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है. जबकि दो सीटे शिक्षक निर्वाचण क्षेत्र की है, जदयू कोटे से कोशी शिक्षक निर्वाचण क्षेत्र से जदयू के संजीव कुमार सिंह और जदयू कोटे से ही गया शिक्षक निर्वाचण क्षेत्र से संजीव श्याम सिंह का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है.

    अप्रैल माह में हो सकता है चुनाव

    माना जाता है कि अप्रैल माह में इन सीटों पर मुकाबला होगा, भाजपा और महागठबंधन की तरफ से इन सीटों पर कब्जे की रणनीतियां बनाने की कवायद शुरु भी चुकी है. होली के बाद कभी भी इसकी डुगडुगी बज सकती है.

    रिपोर्ट: देवेन्द्र कुमार 


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