शाम होते ही बिहार का ये थाना स्कूल में हो जाता है तब्दील, बदमाशों की जगह बच्चों की लगती है क्लास, पढ़ें क्यों

    शाम होते ही बिहार का ये थाना स्कूल में हो जाता है तब्दील, बदमाशों की जगह बच्चों की लगती है क्लास, पढ़ें क्यों

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): बिहार पुलिस की छवि लोगों की नजर में बहुत अच्छी नहीं है. पुलिस लोगों से कभी घूस लेते पकड़ी जाती है, तो कभी बदमाशों को सह देने के लिए बदनाम है, लेकिन इसी बिहार में कुछ ऐसे भी पुलिसकर्मी है, जो अपनी ड्यूटी के साथ-साथ ईमानदारी से एक भारतीय नागरिक होने का भी फर्ज बखूबी निभाते है. आज हम आपको एक ऐसी ही वर्दी वाली मैडम की प्रेरक कहानी बतानेवाले है जिसको सुनकर आपकी नजर में बिहार पुलिस की इज्जत बढ़ जाएगी.

    शाम होते ही बिहार का ये थाना स्कूल में हो जाता है तब्दील

    दअरसल आज हम आपको बिहार के एक ऐसे के थाना के बारे में बताएंगे जो शाम होते ही स्कूल के रूप में तब्दील हो जाता है. जहां बदमाशों की जगह बच्चों की क्लास लगती है. यह अद्भुत नजारा बिहार के मसौढ़ी अनुमंडल स्थित लहसुना थाना में देखने को मिलेगी. इस नजारे को देखकर आपको बिहार की वर्दी पर एक तरफ जहां नाज होगा तो वहीं दूसरी तरफ इस तस्वीर को देखकर आपकी आंखों को बहुत सूकून मिलेगी.

    पढ़ें कौन है खूशबू खातून

    आपको बताये कि लहसुना थाना की थाना प्रभारी खुशबू खातून जो 40 साल की है. वह बिहार में इन दिनों काफी ज्यादा मशहूर हो चुकी है. हो भी क्यों ना, उन्होने काम ही ऐसा अद्भुत किया है. उन्होने अपनी पुलिस की वर्दी का फर्ज निभाते हुए सामाजिक फर्ज भी निभा रही है. और फ्री में रोजाना थाने में गरीब बच्चों को पढ़ाती है. इस जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है. हर तरफ खुशबू खातून की खूब तारीफ हो रही है.

    फ्री में बच्चों को पढ़ाती है वर्दी वाली मैडम

    चलिए अब आपको बता देते है कि खुशबू खातून आखिर कौन है. आपको बता दें कि खुशबू खातून 2018 बैच की दरोगा है. जो नौकरी लगने से पहले ही अपने मोहल्ले के गरीब बच्चों को पढ़ाती थी. वहीं जब उनकी नौकरी लग गई उसके बाद भी इस समय काम को नहीं छोड़ा और आज भी थाने में ड्यूटी के बाद बच्चों की क्लास लगाती है. गरीब परिवार के बच्चे जो पैसे देकर ट्यूशन नहीं पढ़ सकते हैं उनको फ्री में ही पढ़ाती है.

    बचपन से ही टीचर बनने का था शौक

    आपको बताये कि खुशबू खातून रोजाना गांव के करीब 20 से 30 बच्चों को थाने में बुलाती हैं और फिर उन्हें पढ़ाना शुरू कर देती है. खुशबू खातून का कहना है कि हमेशा से ही उन्हें पढ़ाने का काफी ज्यादा शौक था, जब भी वह सड़क के किनारे गरीब बच्चों को खेलते घूमते देखती थी तो उन्हें काफी ज्यादा दुख होता था और वह चाहती थी कि सड़क किनारे रहनेवाले बच्चे भी पढ़ सकें. जिनके माता पिता उन्हें नहीं पढ़ा सकते है, उन्हे वो पढ़ाना चाहती थी. ज्ञान से किसी की भी किस्मत बदली जा सकती है.

    कॉपी किताब भी कराती है उपलब्ध

    खुशबू खातून का कहना है कि वह बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं है बल्की जो बच्चे कॉपी किताब नहीं खरीद सकते है जो असमर्थ होते हैं उन्हें कॉपी किताब भी देती है. वे नर्सरी से लेकर कक्षा पांच तक बच्चों को सभी विषय पढ़ाती है. वहीं बच्चों का कहना है उन्हें ख़ुशबू खातून बहुत अच्छी लगती है और वह काफी अच्छी तरीके से पढ़ाती है जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई में मन लगता है.


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