बेजुबानों के लिए डुमरथर विद्यालय में चलाया जा रहा है दाना-पानी अभियान

    बेजुबानों के लिए डुमरथर विद्यालय में चलाया जा रहा है दाना-पानी अभियान

    दुमका (DUMKA) : भीषण गर्मी से जन जीवन अस्त व्यस्त है. सुबह होते ही आसमान से आग का गोला बरस रहा है. जल स्तर पाताल चला गया है. शहर से लेकर सुदूरवर्ती गांव तक पेयजल के लिए लोग भटक रहे है. काफी जद्दोजहद के बाद इंसान तो अपने लिए पानी की व्यवस्था कर ले रहा है लेकिन जरा उन बेजुबानों के लिए सोचिए. ताल तलैया सुख चुका है और यही ताल तलैया उनके जीवन का आधार माना जाता है. पानी के अभाव में पशु पक्षी तड़प तड़प के जान दे रहा है. ऐसी स्थिति में एक अच्छी खबर दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड के डुमरथर विद्यालय से सामने आया है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ सपन कुमार ने विद्यालय के छात्र एवं ग्रामीणों के सहयोग से पशु पक्षियों के लिए दाना पानी अभियान की शुरुआत की है. 

    पर्यावरण को बचाने के लिए शुरू किया गया पशु पक्षियों को दाना-पानी देने का अभियान

    मिट्टी के वर्तन में रस्सी बांधते ये है डुमरथर विद्यालय के छात्र और छात्रों को रस्सी बांधने की कला सिखा रहे है विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ सपन कुमार. डॉ सपन कुमार ने छात्र एवं ग्रामीणों के सहयोग से पर्यावरण को बचाने के लिए पशु पक्षियों को दाना- पानी देने का अभियान प्रारंभ किया है. उनका मानना है कि गर्मी बढ़ने के साथ जलस्तर काफी नीचे चला गया है. इसका सबसे अधिक असर पशु- पक्षियों पर पड़ रहा है. तपती गर्मी के कारण पक्षी मर रहे हैं. पर्यावरण के प्रति छात्रों एवं ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए इको क्लब द्वारा लाइफ मिशन के तहत दाना- पानी अभियान शुरू किया गया है.

    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ साथ अच्छा संस्कार विकसित करना भी है: डॉ सपन

    प्रधानाध्यापक डॉ सपन पत्रलेख ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ साथ अच्छा संस्कार विकसित करना भी है. भारत की संस्कृति भी हमें भाई चारा एवं पशु पक्षियों के प्रति प्रेम करना सिखाती है. यह अभियान लोगों को प्रकृति के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद करती है. पशु पक्षियों को दाना पानी डालने से अच्छी आदत विकसित होती है. आने वाले पीढ़ी में यह संस्कार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती है. पर्यावरण संतुलन के लिए पशु पक्षि का प्रकृति में रहना आवश्यक है. इस अभियान से विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों में पशु पक्षियों के प्रति, पर्यावरण के प्रति जागरूकता का विकास हो रहा है.

    विद्यालय के पोषक क्षेत्र में लगाया गया घड़ा, प्रतिदिन दिया जाता है दाना पानी

    डॉ सपन पत्रलेख द्वारा "दाना- पानी अभियान" कई वर्षों से इस क्षेत्र में चलाया जा रहा है. अभियान के तहत विद्यालय के पोषक क्षेत्र एवं विद्यालय परिसर में पेड़ पौधों, घरों के बाहर मिट्टी का घड़ा पशु पक्षियों के लिए लगाया जा रहा है. इसमें नित्य दाना- पानी देने की व्यवस्था की गई है. छात्र एवं ग्रामीण इस अभियान को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते है. गांव के मांझी हड़ाम राम विलास मुर्मू ने कहा कि इस तरह के अभियान से आने वाला पीढ़ी पर्यावरण के प्रति शिक्षित हो रहा है. इस मौके पर इको क्लब के सदस्य, प्रबंधन समिति के सदस्य एवं विद्यालय के शिक्षक आदि मौजूद थे.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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