चाचा पर भतीजे ने जदयू के हाथों लोजपा को बेचने का लगाया आरोप, क्या है पूरा मामला पढिएं इस रिपोर्ट में

    चाचा पर भतीजे ने जदयू के हाथों लोजपा को बेचने का लगाया आरोप, क्या है पूरा मामला पढिएं इस रिपोर्ट में

    पटना(PATNA): जमुई लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने इलेक्शन कमिशन द्वारा लोजपा के सिम्बल को फ्रिज करने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे आपनी जीत बताया है.. बता दें कि चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच लोजपा पार्टी के सिम्बल को लेकर झगड़ा चल रहा है जिस पर ब्रेक लगाते हुए चुनाव आयोग ने लोजपा के सिम्बल को फ्रिज कर लिया और दोनों नेताओं को लड़ाई खत्म कर अपना-अपना सिम्बल चुनने की सलाह दी है. जिसके बाद चिराग ने इस फैसले को अपनी जीत बताई है और पशुपति पारस पर लोजपा पार्टी को जदयू के हाथों बेचने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पारस गुट पर हमला करते हुए इसे अपनी जीत बताया है

    चिराग ने ट्वीट कर दी प्रतिक्रिया

    चिराग ने अपने पोस्ट में लिखा है कि, “वंचित समाज की आवाज़ को देशभर में पिताजी ने आंदोलन बनाया. उस आंदोलन की मुखर आवाज़ बनी लोजपा. लेकिन सत्ता के लोभ में फंस चुके कुछ सहयात्रियों ने ही पिताजी के आंदोलन की आवाज़ को कमज़ोर कर दिया. आयोग का ये अंतरिम फैसला है. हमारे तर्कों को जगह मिली है. लोजपा की हुंकार कायम रहेगी”.

    इसके बाद चिराग लिखते है कि, “भयंकर कुचक्र के तहत लोजपा को खंडित करने की मुहिम जारी है. पिताजी के 5 दशकों के परिश्रम को बर्बाद करने में बिहार के सत्तालोलुपों का साथ अपनों ने भी दिया. पिताजी के संकल्पों को विराम देने की इस कोशिश को सफल नहीं होने देंगे. साथियों और समर्थकों से वादा है - जीत लोजपा की ही होगी”.

    अंत में चिराग कहते है कि, “चुनाव आयोग का आज का फैसला उनसे सवाल की तरह है जिन्होंने गरीबों की लड़ाई लड़ रही लोजपा की पहचान मिटाने की कोशिश की है. मां का स्थान रखने वाली पार्टी को महज एक कुर्सी के लिए दलित विरोधी जेडीयू के हाथ बेचने की साज़िश की गई. साज़िश सफल नहीं होगी. लोजपा का ध्वज शान से लहराएगा”.


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