बिहार में बहार है : आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बना पुल, खाट एंबुलेंस ही जिंदगी का सहारा है

    बिहार में बहार है : आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बना पुल,  खाट एंबुलेंस ही जिंदगी का सहारा है

    सहरसा(SAHARSA): बिहार में  बहार है नीतीश कुमार है का नारा आपने बखूबी खूब सुना होगा लेकिन बिहार में विकास की पोल खोल रहा है. सहरसा जिले के ब्रह्शेर पंचायत अन्तर्गत कुम्हारा घाट का खटिया एम्बुलेंस , जी हां कुम्हारा घाट के 25 हजार से अधिक आबादी वाले इस इलाके में लोगों को नदी पार करने के अलावे कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं है. आजादी से लेकर अब तक कितने नेता , मंत्री , विधायक आये और आश्वासन देकर चले गए कि नदी में जीतने के बाद पुल बनवाऊंगा. लेकिन जो भी जीत कर गए वापस नहीं आये और चुनाव में पुनः नई घोषणा करने आये कि अबकी बार नदी में पुल का निर्माण करवाऊंगा.

     बिहार सरकार में विकास का ढिंढोरा  पीटा जा रहा है लेकिन कुम्हारा घाट अन्तर्गत बसे हुए लोगों के लिए खटिया ही एम्बुलेंस है और विषम से विषम परिस्थितियों में एक मात्र सहारा ईलाज करवाने जाने के लिए खटिया  है.

    स्थानीय गोपाल चौधरी ने बताया कि यह एससी एसटी का इलाका है और यहां पुल की निहायत जरूरत है. उन्होंने बताया कि चुनाव में यहाँ एमपी एमएलए आते है और आश्वासन देकर चले जाते है.गोपाल ने बताया कि अचानक लड़के की तबियत खराब हो गयी और इनको सदर अस्पताल लेकर जा रहे हैं नदी के पार एम्बुलेंस लगी हुई है. गोपाल ने बताया कि जीतने के बाद सभी एमपी एमएलए घर में सो जाते हैं, कोई इनको देखने वाला नहीं है.

    वहीं खटिया एम्बुलेंस पर मरीज को अस्पताल ले जा रहे विकी ने बताया कि नदी में कोई सुविधा नहीं रहने से काफी दिक्कत होती है.एम्बुलेंस नदी पार करके नहीं आता है मजबूरी में खटिया पर ही मरीज को ले जाना पड़ता है. विकी ने बताया कि अगर यहां पुल हो जायेगा तो काफी सुविधा मिलेगी.


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