Special : परमाणु हथियारों की कीमत चुका रहा झारखंड का यह गांव ! यहां के बच्चे पैदायशी होते हैं विकलांग और बाँझ हो जाती हैं बच्चियां

    Special : परमाणु  हथियारों की कीमत चुका रहा झारखंड का यह गांव  ! यहां के बच्चे पैदायशी होते हैं विकलांग और बाँझ हो जाती हैं बच्चियां

    रांची(RANCHI): झारखंड का एक छोटा सा गांव देश की परमाणु शक्ति की कीमत चुका रहा है. आदिवासी गांव के बच्चे विकलांग पैदा हो रहे है तो मां की गोद सुनी हो रही है. क्योंकि जिस जादूगोड़ा में यूरेनियम खदान है यहां आस पास गांव भी बसे हुए है. यूरेनियम की रेडिएसन से गांव के लोग बदहाल है.1967 से शुरू हुई यूरेनियम खदान अब तक जारी है. ऐसे में खदान और टेलिंग पॉण्ड (जहां रेडियोएक्टिव कचरा डंप किया जाता है. वहां आस पास रेडिएशन की वजह से लोग शिकार बन रहे है.                        

    देश की परमाणु शक्ति का एक बड़ा आधार झारखंड का जादूगोडा है. देश के गौरव का कीमत आदिवासी 60 सालों से चुका रहें है. जब 1967 के बाद से ही इस गांव में खदान शुरू की गई. तब से लोगों के साथ अजबीगरीब चीजें होते रहती है. कोई महिला बांझ हो जाती है तो किसी का बच्चा विकलांग पैदा लेता है. इतना ही नहीं यहां पर कई पुरुषों के मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है. ऐसे में अगर देखें तो झारखंड का जादूगोड़ा यूरेनियम खदान को लेकर तो विश्व में चर्चा में रहता है.  मगर यहां के गांव और यहां के गांव में रहने वाले आदिवासी बेबस और लाचार जैसे हो गए हैं.

    यूरेनियम खदान के आसपास कई गांव बसे हुए हैं. यूरेनियम के रेडिएशन से गांव के लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई. 1967 से अब तक यूरेनियम खदान चल रही है. ऐसे में खदान और टेलिंग पॉन्ड जहां कचरा डम्प  किया जाता है उसके आसपास रेडिएशन काफी अधिक होता है. गांव की जमीन भी अब अनाज पैदा नहीं करती है. वह भूमि भी बंजर हो गई है.   

    झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला है और यहां जादूगोड़ा गांव है. भारत की पहली यूरेनियम खदान जादूगोड़ा में ही शुरू की गई थी. जो परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल देती है. खदान को यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, के द्वारा संचालित किया जाता है. 1967 के बाद से यहां पर खदान चल रही है यहां से निकले यूरेनियम ने तो देश को परमाणु दे दिया लेकिन यहां के लोगों को क्या मिला यह स्थानीय लोग भी पूछते हैं. 

    यूरेनियम से जो कचरा निकलता है वह काफी घातक होता है. इसके आसपास रेडिएशन फैलता है. जो किसी भी इंसान की जिंदगी के लिए खतरनाक साबित होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 किग्रा यूरेनियम निकाला जाता है तो उसमें 1750 किलोग्राम रेडियोएक्टिव कचरा बनता है. कई शोध में दावा किया गया है कि टेलिंग पॉण्ड तालाबों में रेडियोएक्टिव तत्व मौजूद रहते हैं. जो इंसान के लिए खतरा रहता है. टेलिंग पॉइंट के जितना नजदीक रहेंगे स्वास्थ्य के लिए उतना खतरनाक साबित होता है. जादूगोड़ा में दो टेलिंग पॉण्ड है पहला जादूगोड़ा और दूसरा तुरामडीह है. दोनों ही जगह पर नजदीक में कई परिवार रहते हैं.

    जिस जगह पर टेलिंग पॉन्ड बनाया गया है वहां के आसपास की जमीन भी बंजर हो गई. उस जमीन में अब कोई भी फसल नहीं होती. क्योंकि टेलिंग पॉण्ड से निकलने वाला कचरा और पानी बरसात के समय जिस जिस जगह पर पहुंचता है वहां रेडिएशन पहुंच जाता है, और फिर वह चीज पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है.

    इस गांव में कई महिलाएं ऐसी मिलती हैं. जिनमें चार से पांच बच्चे मरे हुए पैदा हुए. तो कई के विकलांग अपाहिज जन्म लेते हैं. इसके अलावा कई महिला बांझ हो गई. यही वजह है कि इस गांव में बेटियों की शादी भी लोग नहीं करना चाहते हैं, कि यहां पर रेडिएशन का खतरा फैला हुआ है, तो अपनी बेटी को कैसे यहां भेजें.

    बताया जाता है कि रेडिएशन का खतरा सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर असर करता है. यही  नतीजा होता है कि बच्चे मरे हुए पैदा होते हैं. या फिर विकलांग जन्म लेते हैं. इस रेडिएशन से कैंसर ट्यूमर मोतियाबिंद जैसी बीमारियां भी इलाके में होती है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि व्हाइट ब्लड सेल्स को यह सीधे नुकसान पहुंचता है इससे रोगों से लड़ने की शक्ति खत्म हो जाती है.


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