TNP SPECIAL: बाबूलाल को कोर्ट से झटका, क्या रद्द हो जाएगी बाबूलाल की सदस्यता !

    TNP SPECIAL: बाबूलाल को कोर्ट से झटका, क्या रद्द हो जाएगी बाबूलाल की सदस्यता !

    रांची(RANCHI): झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मारांडी की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है. दल बदल मामले में स्पीकर न्यायधीकरण में फैसला सुरक्षित है. वहीं इस फैसले को बाबूलाल ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन कोर्ट ने बाबूलाल को बड़ा झटका दिया है. अब बाबूलाल के पास सुप्रीम कोर्ट का रास्ता बचा है. झारखंड हाई कोर्ट में बाबूलाल की याचिका पर लंबी सुनवाई चली. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सुनवाई हुई , बता दें कि जस्टिस राजेश शंकर ने दोनों पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद एक सितंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बाबूलाल का आरोप था की दलबदल मामले में झारखंड विधानसभा के स्पीकर न्यायाधिकरण में नियमानुसार सुनवाई नहीं हुई है. न्यायाधिकरण ने बगैर उनकी गवाही और बहस सुने बिना ही केस को जजमेंट पर रख दिया है.

    बाबूलाल की याचिका सुनने योग्य नहीं

    अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबूलाल की याचिका सुनने योग्य नहीं है. क्योंकि यह मामला विधानसभा के न्यायाधिकरण में चल रहा है, इसलिए इसके बीच में हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई नहीं हो सकती. बता दें कि बाबूलाल मरांडी की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह,अभय मिश्रा और विनोद साहू ने पक्ष रखा वहीं विधानसभा की तरफ से अधिवक्ता अनिल कुमार और दीपिका पांडे की तरफ से अधिवक्ता सुमति गड़ोडिया ने हाई कोर्ट में बहस की.अब बाबूलाल की सदस्यता पर स्पीकर न्यायधिकरण फैसला सुना सकती है. हाई कोर्ट ने साफ कह दिया की जब  स्पीकर न्यायधिकरण में सुनवाई चल रही है फिर इस मामले में सुनवाई का कोई औचित्य नहीं बनता.    

    पूरा मामला.

    2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा के सिंबल पर निर्वाचित सदस्यों में बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के खिलाफ कुल 7 मामले स्पीकर न्यायाधिकरण में दर्ज हैं. दिसंबर 2020 में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के खिलाफ कांग्रेस विधायिका दीपिका पांडे सिंह, विधायक भूषण तिर्की, विधायक प्रदीप यादव और पूर्व विधायक बंधु तिर्की और राजकुमार यादव ने दसवीं अनुसूची के तहत दल बदल  से संबंधित शिकायत की है. इस मामले में विधानसभा न्यायधिकरण में सुनवाई पूरी हो चुकी है. स्पीकर ने भी फैसला सुरक्षित रख लिया है.इस सुनवाई को बाबूलाल ने झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इस दौरान बाबूलाल के मामले पर हाई कोर्ट में लंबी बहस चली और एक सितंबर 2022 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया. इस मामले में आज यानि मंगलवार को कोर्ट ने इस याचिका को सुनने योग्य नहीं बता कर रद्द कर दिया है.          

    बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से अलग होकर अपनी एक अलग पार्टी बनाई थी

    आपको बता दें कि बाबूलाल मरांडी ने भाजपा से अलग होकर अपनी एक अलग पार्टी बनाई थी,  झारखंड विकास मोर्चा के नाम से 2019 के विधानसभा चुनाव के समय झारखंड विकास मोर्चा के सिंबल से बाबूलाल मरांडी के साथ साथ बंधु तिर्की  और प्रदीप यादव ने भी जीत दर्ज की थी.  विधानसभा चुनाव  के बाद  बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा पार्टी का विलय भाजपा में कर लिया. भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें सहर्ष स्वीकार करते हुए अपने विधायक दल का नेता चुना लेकिन झारखंड विधानसभा में इन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला. झारखंड विधानसभा में कई सत्र चले ,लेकिन उसमें नेता प्रतिपक्ष की भूमिका नहीं रही.

     


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