TNP SPECIAL: Tribal बेटियों से Love Zihad! मामला पहुंचा कोर्ट

    TNP SPECIAL: Tribal बेटियों से Love Zihad! मामला पहुंचा कोर्ट

    रांची(RANCHI): किसी देश में अगर दूसरे देश के लोग घुसपैठ करते हैं तो यह देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर मुद्दा है. लेकिन झारखंड में यह राजनीति का मुद्दा बन कर रह गया है. झारखंड के साहिबगंज जिले में बांगलादेश का बॉर्डर है. इसी बॉर्डर से हर दिन सैकड़ों की संख्या में घुसपैठिया भारत में घुस रहे हैं. घुसने के बाद बांग्लादेशी झारखंड की आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसा कर उनसे शादी करते हैं, इसके बाद सारे सरकारी दस्तावेज बनवाने में जुट जाते हैं.इतना ही नहीं आदिवासियों की जमीन पर भी कब्जा कर रहे है. इस मामले की पूरी सच्चाई हम आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे. 

    कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से मांगा रिपोर्ट

    एक ओर भाजपा घुसपैठ को संरक्षण देने का आरोप राज्य की सरकार पर लगा रही है तो वही सत्ता पक्ष गृह मंत्रालय से पूछ रहा है कि आखिर देश में कैसे बांग्लादेशी घुस रहे हैं. इन सब के बीच अब हाईकोर्ट में भी घुसपैठ के मुद्दे को लेकर याचिका दायर की गई,  इस याचिका के पहली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को रिपोर्ट तलब करने का निर्देश दिया है साथ ही गृह मंत्रालय से पूछा कि बांग्लादेशी घुसपैठ की जानकारी उन्हें है या नहीं अगर जानकारी है तो आपने अबतक क्या कार्रवाई किया गया.

    बढ़ी मुस्लिम आबादी

    इन सब के बीच अगर हम संताल परगना की बात करें तो यहां की मुस्लिम आबादी पिछले कई सालों से बेतहाशा बढ़ रही है.पाकुड़ और साहिबगंज में कुल मुस्लिम आबादी 2011 के जनगणना के हिसाब से बहुत बढ़ी है. बताया जाता है कि यहां 2011 में आदिवासियों की आबादी 48 प्रतिशत थी लेकिन अब आदिवासी की जनसंख्या कम हो गई और मुसलमानों की बढ़ गई है.

    उधवा प्रखण्ड से देश में प्रवेश करते हैं बांग्लादेशी

    अगर हम बात बांग्लादेश बॉर्डर से सटे झारखंड के इलाकों की बात करें तो साहिबगंज का उधवा प्रखण्ड गंगा से सटा हुआ है, उधवा में 23 पंचायत आते हैं जिसमें 12 ऐसे पंचायत है जो दियारा(TAAPU) में शामिल है. क्योंकि गंगा से सटे होने के कारण यहां बाढ़ का खतरा भी मंडराता रहता है यह आबादी बाढ़ की चपेट में रहती है. इसी क्षेत्र में गंगा के सहारे बांगादेशी पहुंचते हैं,पहले गंगा के दियारा(TAPU) में झोपड़ी लगाकर रहना शुरू कर देते हैं. झोपड़ी में कुछ दिन रहने के बाद यहां से बंगलदेशी छोटे स्तर पर गांव मुहल्ले में घूम घूम कर कुछ समान बेचने की शुरुआत करते हैं.  धीरे धीरे यह लोग यहां के लोगों के साथ घुलने मिलने लगते हैं.

    प्रेम जाल में फसा करते हैं शादी

    दावा किया जाता है कि समान बेचने के दौरान आदिवासी बेटियों को लक्ष्य बना कर उन्हे प्रेम जाल में फ़ंसाने का काम करते हैं, आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फ़ंसाने के बाद उन्हे शादी का ऑफर देते हैं, जब शादी के लिए बात बन जाती. फिर उसपर दबाव बना कर जमीन और घर की डिमांड करते हैं. घर मिल जाने के बाद वह धीरे-धीरे सरकारी दस्तावेजों को बनवाने की शुरुआत होती है.   

    43 सरकारी मदरसे      

    मुस्लिम आबादी बढ़ने का अंदाज आप मदरसों की बढ़ती संख्या से लगा सकते है, साहिबगंज जिले में सरकारी अनुदान से चलने वाले 43 मदरसे हैं, जिसमें उधवा में सात है. 43 तो सरकारी आंकड़ों में है, निजी स्तर पर कितने चल रहे है, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते है.

    NRC की मांग तेज

    मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या पर भाजपा ने राज्य सरकार पर लगाया है.राजमहल विधायक अनंत ओझा ने कहा कि संथाल में बढ़ती जनसंख्या देश की सुरक्षा के लिए खतरा है इन सब को देखते हुए संथाल में NRC की जरूरत है.उन्होंने कहा कि देश के लिए अंतरिम सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है. बांग्लादेशी घुसपैठियों के द्वारा क्षेत्र में धर्म बदल कर आदिवासी बच्चियों के साथ शादी कर उन्हें मौत के घाट उतार रहे है. इस मामले में कई बार विधानसभा के पटल पर उठा चुके है.      

    बांग्लादेशी को सरकार का संरक्षण

    प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने गठबंधन की सरकार पर वोट बैंक कर लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को संरक्षण देने का आरोप लगाया है.उन्होंने कहा कि साहिबगंज जिले में 43 सरकारी मदरसे है इससे यह साबित होता है कि सरकार क्या कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठ को राशन कार्ड से लेकर सभी दस्तावेज बनवाने का काम किया है.साहिबगंज घुसपैठ का एक अड्डा बन कर रह गया है.      

    केंद्र सरकार दे जवाब

    इसपर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने गृह मंत्रालय पर सवाल खड़ा कर दिया है कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ एम तोसिफ़ ने गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है कि आखिर BSF क्या कर रही है किसी देश की सुरक्षा की जिम्मेवारी राज्य सरकार पर तो नहीं रहती.उन्होंने कहा कि जैसे भाजपा देश के सभी मुद्दों पर फेल है वैसे ही अब देश की सीमा को भी यह लोग सुरक्षित नहीं है.अगर इस मामले में दम है तो केंद्र सरकार जांच कर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है.     

    इन सब के बीच अब सभी की निगाहें कोर्ट पर टिकी है आखिर क्या संथाल में बंगलदेशी घुसपैठियों को अब चिन्हित किया जा सकेगा? .जल्द ही बांग्लादेशी पर कार्रवाई नहीं की गई तो यह देश की सुरक्षा के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ी चुनौती बन सकता है.


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