जब चलती रेल में हुई महिला को प्रसव पीड़ा, फिर रेलवे अधिकारियों ने यह किया

    जब चलती रेल में हुई महिला को प्रसव पीड़ा, फिर रेलवे अधिकारियों ने यह किया

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : रेलवे ने आज एक अनोखी मिसाल पेश की. जहां एक ओर मां की ममता मुस्कुरायी, वहीं एक नई जिंदगी ने दुनिया की भोर देख कर अपने पहले रूदन से शुक्रिया कहा. इन सबका साक्षी बना जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन. आइए जानें, क्या है कहानी-

    जिंदगी बचा गया पल भर का निर्णय

    जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन के लिए आज के दिन की शुरुआत भी आम दिनों की तरह ही हुई थी.  बुधवार यानि आज सुबह 3 बजकर 55 मिनट पर आनंद विहार टर्मिनल से भुवनेश्वर की ओर जाने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस स्टेशन पर आई. 10 मिनट के नियत ठहराव के बाद यह ट्रेन टाटा से अपने गंतव्य के लिए रवाना की गई.  ट्रेन आउटर तक आगे गई होगी कि आरपीएफ जवानों ने कंट्रोल रूम को सूचित किया कि  ट्रेन के बर्थ नंबर एस 5 के 61 नंबर सीट में एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही है. सूचना मिलते ही वरीय अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझा. यहां इंतजार या अन्य कोई विकल्प की कोई गुंजाइश नहीं, और ऐसा करना दो-दो जिंदगियों पर भारी पड़ सकता, यह तुरंत आकलन कर लिया. मानवता और तत्परता ही समय की मांग थी जिसे वरीय अधिकारियों ने दिखाया और तुरंत ट्रेन को वापस स्टेशन लाने का आदेश दिया. आदेश के साथ एंबुलेंस तैनात रखा. जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर वापस आई, तुरंत महिला को ट्रेन से उतारा गया और एंबुलेस से सदर अस्पताल पहुंचाया गया. सदर अस्पताल में महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया.  

    बहरहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.  बुधवार सुबह की इस आपाधापी में रेल के पन्नों पर जिंदगी का एक खूबसूरत नाम लिखा गया. यकीनन बच्चा और वह परिवार ताउम्र भारतीय रेल के इस खास पन्ने को यादों में संजोए रखेंगे.

     


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