दूर प्रदेश से आए कलाकार, कहा - कला काे पहचानिए हुजूर..!

    दूर प्रदेश से आए कलाकार, कहा - कला काे पहचानिए हुजूर..!

    गोड्डा (GODDA) – राजस्थान के कुंदन और सूरज कोरोना के भय और गम के बीच लोगों के चेहरों पर खुशी और मुस्कान लाने की कोशिश में जुटे हैं. बता दें कि ये दोनों राजस्थान से 15 सौ किलोमीटर दूर चलकर झारखंड के गोड्डा जिला के पथरगामा  पहुंचे हैं. जहां ये विभिन्न प्रकार के स्वांग रचा कर दूसरों के मनोरंजन का पात्र बन रहे हैं.

    लोग समझते हैं भिखारी

    जिले में बुधवार को ये दोनों सगे भाई कुंदन भांट और सूरज भांट ने मजनू और जोकर का रूप धारण कर लोगों का मन मोह लिया. बहरूपिये बन कर पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर लोगों को लुभा और हंसा कर पेट भरना ही इन लोगों का पेशा है. लोगों को जोकर बन हसा कर ही इनके परिवार के दस सदस्यों का पेट पलता है. कुंदन और सूरज बहरूपिये ने बताया कि राजस्थान के इलाकों में उन्हें राजा-रजवाड़ों द्वारा सम्मान की नज़रों से देखा जाता है. लेकिन देश के अन्य क्षेत्रों में अब लोग इन्हें सिर्फ भिखारी ही समझते हैं.

    हंसी के पीछ दर्द

    हालांकि ये कला विलुप्त होता जा रही है. लेकिन दूसरों को हसाने की इनकी इस कला को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. भले ही ये गरीब और आर्थिक रुप से परेशान हों, लेकिन इनके चेहरों पर हंसी देख कोई भी इनके दर्द की अनुभूति करने में नाकाम ही रहता है.

    रिपोर्ट : राजेश कुमार टेकरीवाल, पथरगामा, (गोड्डा)


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