नौकरी का सर्टिफिकेट लेकर पहुंची खिलाड़ी बिटिया, सफलता देख छलक पड़े मां-पापा के आंसू

    नौकरी का सर्टिफिकेट लेकर पहुंची खिलाड़ी बिटिया, सफलता देख छलक पड़े मां-पापा के आंसू

    सिमडेगा  (SIMDEGA)  : कहते हैं कि सपनों के पीछे की गई मेहनत जब साकार होती है तो खुशी आंखों से नजर आती है. ऐसा ही नजारा आज इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी ब्यूटी डुंगडुंग के घर पर नजर आया. ब्यूटी को इंडियन ऑयल कंपनी ने एक अच्छे पद पर नौकरी भी दे दी. खेल के बल पर बेटी को नौकरी मिलने की खुशी जानने हम जब ब्यूटी डुंगडुंग के घर पंहुचे तो वहां ब्यूटी के माता पिता की आंखों में बेटी की कामयाबी बताते-बताते खुशी के आंसू झलक पड़े. 

    खेत बंधक रखकर बेटी को बढ़ाया

    जूनियर महिला हॉकी वर्ल्ड कप सहित कई हॉकी चैंपियनशिप में जूनियर भारतीय महिला टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी ब्यूटी डुंगडुंग सिमडेगा के करंगागुड़ी स्थित बाजुटोली के एक गरीब परिवार से आती हैं. ब्यूटी डुंगडुंग के पिता अमरस डुंगडुंग जो अपने जमाने के नेशनल हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं. इन्होंने बचपन में अपनी बेटी ब्यूटी के अंदर के एक माहिर खिलाड़ी को पहचाना और उसे खेल के मुकाम तक पहुंचाने की ठानी. लेकिन बेटी को खिलाड़ी बनाने का सफर इनके लिए आसान नहीं था. इनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी इनकी आर्थिक तंगी. खैर ब्यूटी के पिता ने हौसला टूटने नहीं दिया. इन्होंने खेत को बंधक रखा. गांव में कई दोस्तों से कर्ज लिया और आखिरकार बेटी के अंदर की खिलाड़ी को बाहर लाकर हॉकी के मुकाम पर पंहुचा दिया.

    काबिले-तारीफ है पिता का संघर्ष  

     पिता ने बताया कि किस तरह उन्होने मुंबई में मजदूरी कर, खेत बंधक कर और कर्ज लेकर बेटी को किस तरह एक मुकाम दिलाई. एक दौर था जब कोरोना काल में डे बोर्डिंग बंद थे. तब ब्यूटी जैसी खिलाड़ियों को पौष्टिक आहार नहीं मिलता था. उस वक्त अपने गांव में ब्यूटी ने खेतों तक में काम किया. उसी लगन और हौसले ने आज उसे यह मुकाम दिया है. ब्यूटी के पिता अमरस ने बताया कि ब्यूटी की मां नीलिमा को पक्षाघात हुआ था. वे देहाती स्तर पर इलाज करवा रहे हैं. बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को आगे बढ़ने में कभी पैसों की कमी महसूस नहीं होने दी.

    ब्यूटी करती रहती है परिवार की मदद

    अमरस ने बताया कि ब्यूटी जब भी घर आती है तो अपने स्टाइपन के पैसे से घर में हमेशा मदद करती है. ब्यूटी का एक और भाई सचिन भी हॉकी खिलाड़ी है. वर्तमान में वह भी बैंगलोर में कैंप में ट्रेनिंग ले रहा है. ब्यूटी के पिता अमरस ने बताया कि उन्हें उनके खेल और हॉकी की जानकारी को देखते हुए करंगागुड़ी हॉकी ट्रेनिंग सेंटर से कई बार कोच बनने के ऑफर मिले हैं. लेकिन पत्नी की बीमारी के कारण वे कोच नहीं बन पाए. ब्यूटी के माता पिता दोनों ने आज कहा कि बेटी को नौकरी मिलने से उनका जो संघर्ष था सार्थक हुआ.

    ब्यूटी की कामयाबी में कोच प्रतिमा बरवा का अहम योगदान

    अमरस के पिता अपनी बेटी की इस कामयाबी के पीछे एसएस बालिका एस्ट्रोटर्फ हॉकी ट्रेनिंग सेंटर की कोच प्रतिमा बरवा का अहम योगदान मानते हैं. उन्होने बताया कि ब्यूटी का सबसे पहले सेलेक्शन लचडागढ डे बोर्डिंग में हुआ था. फिर वहां से प्रतिमा बरवा उसे अपने डे बोर्डिंग में लेकर आई और एक अच्छे गुरु के साथ साथ एक मां का भी प्यार दिया. अमरस ने बताया कि कभी कुछ कमी भी होने पर प्रतिमा ने उन कमियों को पूरी कर ब्यूटी को हॉकी के सभी गुर सिखाए. इसकी बदौलत ब्यूटी कामयाबी के मुकाम तक पहुंची है.

     बहरहाल,  कष्ट काट कर बेटी को कामयाबी के मुकाम तक पहुंचाने वाले माता-पिता निश्चित रूप से एक प्रेरणास्रोत हैं. बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाडी है. इसके बाद भी इसके माता-पिता बड़े साधारण तरीके से जीवन यापन कर रहे हैं. गरीबी काट कर बेटी के कामयाबी से इनका सीना चौड़ा है.

    रिपोर्ट : अमित रंजन, सिमडेगा  


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