Jharkhand Assembly Election: सरयू राय और रघुवर दास की अघोषित दोस्ती का कितना लाभ एनडीए को, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    Jharkhand Assembly Election: सरयू राय और रघुवर दास की अघोषित दोस्ती का कितना लाभ एनडीए को, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड का कोल्हान सिर्फ चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की ही परीक्षा नहीं ले रहा है. बल्कि झारखंड से दूर बैठे नेताओं की भी इस चुनाव में अग्नि परीक्षा होगी. भाजपा के थिंक टैंको की भी परीक्षा होगी. चंपाई सोरेन को भाजपा में लाने का कितना लाभ एनडीए को मिल रहा है, इसकी भी गणना हो रही है. यह भी पता चल रहा कि सरयू राय की जमशेदपुर पश्चिम सीट पर कितनी मजबूत पकड़ है. क्या फिर बन्ना गुप्ता अपनी जीत को दोहराएंगे. घाटशिला सीट से चंपई सोरेन  के बेटे का भी भविष्य तय हो रहा है. यह भी पता चल जाएगा की उनकी और उनके पिता की राजनीति आगे किस राह पर चलेगी. यह भी लोग जान पाएंगे कि पूर्व मुख्यमंत्री और फिलहाल ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास की उनकी परंपरागत सीट जमशेदपुर पूर्वी में कितनी पकड़ अभी भी है. यह भी लोग जान सकेंगे कि जमशेदपुर के एसपी रहे अजय कुमार का भविष्य क्या होगा. एस पी के रूप में अजय कुमार जितने सफल रहे, क्या 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें सफलता चूमेगी. वैसे कोल्हान प्रमंडल की 14 सीटों में से तीन पर हेमंत सरकार के तीन मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं.

    जमशेदपुर पश्चिम सीट से स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, घाटशिला सीट से शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन चुनाव मैदान में है. वही चाईबासा से परिवहन मंत्री दीपक बीरुआ अपने परंपरागत सीट से चुनावी मैदान में है. तीनों मंत्रियों का मुकाबला एनडीए प्रत्याशियों से है.

    मंत्री बन्ना गुप्ता और सरयू राय का मुकाबला होगा रोचक 

    इधर जमशेदपुर पश्चिम में एक दूसरे के विरोधी मंत्री बन्ना गुप्ता और सरयू राय का मुकाबला रोचक दौर में पहुंच रहा है. जमशेदपुर पश्चिम सीट से दोनों दो-दो बार चुनाव जीत चुके हैं. 2019 में बन्ना गुप्ता के सामने भाजपा के देवेंद्र सिंह थे. बन्ना गुप्ता ने उन्हें आसानी से हरा दिया था. सरयू राय ने 2005 और 2014 में बन्ना गुप्ता को हराया था. जबकि 2009 में बन्ना गुप्ता से हार गए थे. इस बार सरयू राय जदयू के प्रत्याशी हैं. वह  एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम से भी हेमंत सोरेन के मंत्री रामदास सोरेन चुनाव लड़ रहे हैं. चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन उनके सामने हैं. मात्र 6 महीना पहले तक झामुमो के लिए काम कर रहे बाबूलाल सोरेन अब भाजपा का गुणगान कर रहे हैं. अब वह भाजपा की ओर से टक्कर दे रहे हैं. बाबूलाल सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे हैं .2014 में यह सीट भाजपा के खाते में आई थी. लक्ष्मण टुडू ने रामदास सोरेन को हराया था. लेकिन 2019 में रामदास सोरेन ने जीत हासिल की थी. वही चाईबासा सीट से मंत्री दीपक बी रुआ चुनाव मैदान में है. उनका मुकाबला गीता बालमुचू से है .भाजपा ने चाईबासा नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष गीता बालमुचू को मैदान में उतारा है.दीपक बी रुआ 2009 में बागुन सु म ब्राई को हराकर पहली बार विधायक बने थे. दीपक बी रुआ 2014 और 2019 में भाजपा प्रत्याशी जेबी  तूविद को हराकर कब्जा बनाए रखा. इस बार देखना  है क्या होता है. लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि हेमंत सोरेन के तीन मंत्रियों के सामने के प्रत्याशी कितनी टक्कर दे पाएंगे.

    2024 का चुनाव तय करेगा सरयू राय का भविष्य 

    वैसे 2019 में कोल्हान की 14 सीटों में से एक भी सीट भाजपा के खाते में नहीं आई थी. उस समय भाजपा की बहुत किरकिरी हुई थी. मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास जमशेदपुर पूर्वी सीट से चुनाव हार गए थे. झारखंड की राजनीति और झामुमो की पकड़ मजबूत होने का यह समय टर्निंग पॉइंट था. हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. फिलहाल रघुवर दास की बहू जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा की प्रत्याशी हैं. जमशेदपुर पूर्वी सीट भी रघुवर दास के कद काठी का भविष्य तय करेगा. तो सरयू राय का भी भविष्य 2024 का चुनाव तय करेगा. 2019 में तो उन्होंने रघुवर दास के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़कर उन्हें परास्त कर दिया और चर्चा में आ गए. यह अलग बात है कि दो मुख्यमंत्री को हराने वाले एक नेता रहे सरयू राय और दूसरे रहे राजा पीटर दोनों इस बार जदयू के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं. चुनाव परिणाम इन दोनों का भविष्य भी तय करेगा.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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