झारखंड राज्य स्थापना दिवस : कार्यक्रम में अलग-अलग दिखे राज्यपाल और सीएम, मुलाकात के दौरान चेहरे पर नहीं दिखी मुस्कान

    झारखंड राज्य स्थापना दिवस : कार्यक्रम में अलग-अलग दिखे राज्यपाल और सीएम, मुलाकात के दौरान चेहरे पर नहीं दिखी मुस्कान

    रांची(RANCHI): झारखंड विधानसभा का 22वां स्थापना दिवस काफी धूम-धाम से मनाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के मौके पर विधानसभा में राज्यपाल को सलामी दी गई. इसके अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने राज्यपाल का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. लेकिन इस दौरान सीएम और राज्यपाल साथ होकर भी साथ नहीं दिखे. दोनों की मुलाकात जरूर हुई लेकिन चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी. वहीं, कार्यक्रम स्थल पर विधायकों के लिए भी कुर्सी और सोफे लगाए थे. लेकिन विपक्ष के ज्यादातर विधायक इस कार्यक्रम में नदारद रहें. दरअसल, ये कार्यक्रम राज्य के लिए थे. लेकिन इस मौके पर भी विधायकों का कार्यक्रम से दूर रहना अच्छे संकेत नहीं थे. विधायकों की अनुपस्थिति में कार्यक्रम का माहौल सुना-सुना लग रहा था. वहीं, कार्यक्रम के शुरूआत में स्कूली बच्चों ने अतिथियों के स्वागत में स्वागत गान गाया. वहीं, बता दें कि आज के कार्यक्रम में उत्कृष्ट विधायक विनोद कुमार सिंह को सम्मानित भी किया गया.

    कार्यक्रम के दौरान राज्य ने क्या कहा जानिए

    राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए अलग राज्य गठन किया गया था. आज मंथन का भी दिन है आखिर 22 वर्षों में हम कितना आगे राज्य को लेकर गए है. जिन क्षेत्रों में काम कम हुआ है उसमें बेहतर करने की जरुरत है. उन्होंने कहा कि सदन में कम बैठक और सदन ठीक से नहीं चलना भी सोच का विषय है. जनप्रतिनिधियों को जनता अपने समस्या को लेकर चुनती है और अपनी समस्या को सदन पर रखने की उम्मीद होती है. उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों को जनप्रतिनिधि सरकार के पास रखे और उसे दूर कराए. किसी भी कानू के बनने समय सभी प्रतिनिधि उसे पूरी तरह से जानकारी ले. सदन में ज्यादा से ज्यादा मुद्दों को प्रतिनिधि सवाल उठाए. जिससे जनता ऐसा कहे कि हमारा विधायक उत्कृष्ट है. वहीं, राज्यपाल ने विनोद सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि वो काफी जमीन से जुड़े हुए नेता हैं.   

    हेमंत ने कही ये बात

    सभा को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि माइक हाथ में आने के बाद कितना लंबा भाषण जायेगा कहना मुश्किल है, लेकिन आज उत्साह का दिन है इसलिए केवल उसी की बात होगी. उन्होंने कहा कि आदिवासी दलित पिछड़े अल्पसंख्यक पर लंबे समय तक शोषण चला. झारखंड वीरों की धरती है यहां बिरसा मुंडा, तिलंगा खड़िया समेत कई योद्धाओं ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी. आखिर में हमें 2000 में शिबू सोरेन के आंदोलन के बदौलत अलग राज्य मिला. राज्य गठन के बाद विधानसभा बना और कार्यपालिका और विधायिका मिली दोनों बेहतर काम कर रहे हैं.


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