Bihar Politisc: तेजस्वी-चिराग पर गरमाई बिहार की सियासत, पोस्टर पर छिड़ा विवाद, पढ़ें क्या है संकेत

    Bihar Politisc: तेजस्वी-चिराग पर गरमाई बिहार की सियासत, पोस्टर पर छिड़ा विवाद, पढ़ें क्या है संकेत

    पटना(PATNA): बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है, और इस बार वजह है राजधानी पटना की दीवारों पर दिख रहे राजनीतिक पोस्टर है. विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच ‘पोस्टर वार’ छिड़ गई है. यह सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि पार्टी की रणनीति, आत्मविश्वास और अंदरूनी खींचतान का भी संकेत है.एक ओर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से लगाया गया पोस्टर साफ तौर पर चिराग पासवान को राज्य के भविष्य के रूप में प्रस्तुत करता है.पोस्टर में लिखा है कि "चिराग का चेहरा सबसे प्रबल और मजबूत है," और दावा किया गया है कि उनके नेतृत्व में बिहार से पलायन और बेरोजगारी की समस्या खत्म की जा सकती है, साथ ही, यह भी उल्लेखनीय है कि चिराग को शेखपुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का 'ऑफर' इस पोस्टर में सार्वजनिक रूप से दिया गया है, जो संकेत करता है कि पार्टी में अब ‘सीधा जनता से संवाद’ करने की रणनीति अपनाई जा रही है.

    सबसे बड़ा संदेश यह है

    अगर एनडीए में चिराग को उचित सम्मान नहीं मिला, तो वह अकेले चुनावी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेंगे.दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से लगाया गया पोस्टर तेजस्वी यादव के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है. पोस्टर में सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और खुद बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्रियों का उल्लेख कर यह कहा गया है कि ये सभी मिलकर भी तेजस्वी को रोक नहीं पा रहे है.यह पोस्टर साफ करता है कि राजद अब तेजस्वी को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश में है एक ऐसा चेहरा जो अब सिर्फ बिहार में नहीं, बल्कि देश की राजनीति में भी बड़ी चुनौती बन सकता है.

    राजनीति में पोस्टर लंबे समय से एक असरदार माध्यम रहा है

    बिहार की राजनीति में पोस्टर लंबे समय से एक असरदार माध्यम रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह केवल प्रचार नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत देने का सशक्त माध्यम बन चुका है. चिराग के पोस्टर से जहां गठबंधन की दरार के संकेत मिलते हैं, वहीं तेजस्वी के पोस्टर से यह स्पष्ट होता है कि वह खुद को अब विपक्ष के नेता से आगे बढ़ाकर सत्ता के दावेदार के रूप में पेश कर रहे है.इन पोस्टरों से स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति अभी से चुनावी मोड में आ चुकी है.गठबंधन की खींचतान, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और नेता की छवि सब कुछ अब दीवारों पर उतर आया है.आने वाले दिनों में यह पोस्टर युद्ध और तीखा हो सकता है, और इससे मतदाता भी इस बार ज्यादा सजग, सतर्क और जागरूक होंगे.


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