झारखंड सरकार की मूंछ बचेगी कि होगा मध्यावधि चुनाव,आखिर अपने ट्वीट्स को लेकर एकबार फिर चर्चे में क्यों जयराम महतो!

    झारखंड सरकार की मूंछ बचेगी कि होगा मध्यावधि चुनाव,आखिर अपने ट्वीट्स को लेकर एकबार फिर चर्चे में क्यों जयराम महतो!

    Jharkhand Politics: सियासत -राजनीति केवल नीति और विचारों की  नहीं होती, यह परिस्थितियों की भी गुलाम होती है.   शायद यही वजह है कि झारखंड की सियासत  में आगे कुछ होगा अथवा नहीं, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है.  लेकिन तमाम मंत्रियों की बेचैनी बढ़ी हुई है.  मंत्री चाहे वह झामुमो  के हो अथवा गठबंधन दलों के, सभी वेट एंड वॉच की मुद्रा में है.  इस बीच झारखंड के चर्चित युवा विधायक जयराम महतो अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्टों को लेकर एक बार फिर चर्चा में है.  

    शुक्रवार को उन्होंने सरकार के भविष्य को  लेकर दो ट्वीट किया है.  एक में उन्होंने कहा है कि बीजेपी और झामुमो के साथ आने से जयराम महतो जहां है, वहीं रहेगा.  बस यही चाहेंगे कि राज्य का विकास हो.  उनके साथ आने से जो केंद्र से राशि  रुकी हुई  है, वह मिल जाएगी.  जो विकास रुका हुआ है, वह शुरू हो जाएगा.  यह मेरा निजी तौर पर मानना है.  दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है कि अगर झामुमो को लगता है कि जिसके साथ गठबंधन किया है, उनके  साथ विचारधारा मेल  नहीं खा रही तो मध्यावधि  चुनाव की तरफ बढ़ना चाहिए. 

     एक दिन पहले उन्होंने ट्वीट किया था कि बीजेपी और झामुमो को मिलकर सरकार बना लेना चाहिए.  मं ई या  सम्मान योजना सरकार की मूंछ है और अपनी मूंछ को बचाने के चक्कर में सारा पैसा जा चुका है.  खैर ,पिछले कई दिनों से झारखंड का  सियासत गर्म है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन के दिल्ली में कई दिनों तक रहने की वजह से यह चर्चा जोर पकड़ी.  और बात इतनी दूर तक गई कि  गठबंधन दलों के शीर्ष नेताओं को भी जानकारी जुटानी  पड़ी.  

    कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी बेणुगोपाल   को कहना पड़ा कि झारखंड में गठबंधन एकजुट है और आगे भी एकजुट रहेगा.  इधर, चर्चाओं की बात की जाए तो लोग अपने-अपने ढंग से चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं और बढ़ा रहे है.  धनबाद में एक चर्चा तेजी से चल रही है कि झामुमो  और बीजेपी में बात लगभग तय हो गई है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रहेंगे और भाजपा  का कोई डिप्टी सीएम होगा.  कल्पना सोरेन को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है.  सच्चाई जो भी हो, लेकिन चर्चाएं थम नहीं रही है.  मंत्री और विधायकों को सफाई देनी पड़ रही है कि ऐसी कोई बात नहीं है.  झामुमो ने भी इन सारी बातों को अफवाह और बकवास बताया है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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