“राज्यपाल के अभिभाषण में 1932, ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को क्यों नहीं किया गया शामिल?”  विधायक लंबोदर महतो ने सदन में पूछे सवाल

    “राज्यपाल के अभिभाषण में 1932, ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को क्यों नहीं किया गया शामिल?”  विधायक लंबोदर महतो ने सदन में पूछे सवाल

    रांची(RANCHI): झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही गोमिया से आजसू विधायक लंबोदर महतो ने सरकार पर जमकर हमला बोला और कई तीखे सवाल पूछे. लंबोदर महतो ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण और सरकार के काम में आसमान जमीन का फर्क है. जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है. जनता जानना चाहती है कि 1932 खतियान का क्या हुआ? सरकार को 1932 खतियान का अध्यादेश ला कर इसे पारित करना चाहिए था. इसे राज्यपाल के अभिभाषण में शामिल करते तो बेहतर होता.

    वहीं उन्होंने आगे पूछा कि 28 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का भी सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए था. यह सब मुद्दा राज्यपाल के अभिभाषण से गायब हो गया है. लंबोदर महतो ने सवाल पूछा कि 1932 और ओबीसी आरक्षण का क्या हुआ? झारखंड के पारसनाथ पहाड़ का मामले को भी गंभीरता से लेने को कहा.

    झारखंड आंदोलनकारी आयोग में पेंडिंग पड़े हैं आवेदन

    उन्होंने कहा कि आदिवासी मूलवासी के भगवान मरांगबुरु पारसनाथ में कैद हो गए. इस मामले पर भी सरकार को कदम उठाने की जरूरत है. झारखंड आंदोलनकारी आयोग में कोई काम नहीं हो पा रहा है. झारखंड आंदोलनकारी के 58 हजार आवेदन पेंडिंग है, जिन्होंने राज्य को अलग करने में अपने प्राण दाव पर लगाया, लेकिन आज उनकी क्या दुर्दशा है, कोई देखने वाला नहीं है. निजी कंपनी में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने के विधेयक को सदन से पास कर दिया, लेकिन आज भी स्थानीय को किसी निजी कंपनी ने काम नहीं दिया गया.उन्होंने ीं सारे सवालों के जवाब सरकार से पूछे.

    रिपोर्ट: समीर हुसैन, रांची  


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