कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद के दो अक्टूबर को ही अस्पताल में भर्ती होने के क्यों निकाले जा रहे राजनीतिक मायने,पढ़िए डिटेल्स में

    कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद के दो अक्टूबर को ही अस्पताल में भर्ती होने के क्यों निकाले जा रहे राजनीतिक मायने,पढ़िए डिटेल्स में

    धनबाद(DHANBAD): कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद फिलहाल चर्चे में है. हवा फैली थी कि 2 अक्टूबर को वह भाजपा में शामिल हो सकती हैं. यहां तक दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री की सभा में वह भाजपा का दामन थाम सकती है.हालांकि इसका उन्होंने जोरदार खंडन करते हुए अफवाह बताया था. कहा था कि उनके विरोधी हवा फैला रहे हैं.

    2 अक्टूबर को भाजपा में शामिल होने की थी चर्चा

    इधर, 2 अक्टूबर को ही अस्पताल में भर्ती होने के कारण फिर एक बार अंबा प्रसाद चर्चा में आ गई हैं. गांधी जयंती के अवसर पर गांधी स्मारक समिति, पीटीपीएस में आयोजित कार्यक्रम में वह बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने पहुंची थी.  कार्यक्रम के दौरान ही उनकी तबीयत खराब हो गई. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक थकान एवं शरीर को आराम नहीं देने के कारण तबीयत में गिरावट आई है. अंबा प्रसाद को ले चर्चा थी कि 2 अक्टूबर को वह भाजपा में शामिल हो सकती हैं. वैसे इस अफवाह का खंडन करते हुए उन्होंने कहा था कि वह कांग्रेस की सच्ची सिपाही हैं और हमेशा कांग्रेस में ही रहेगी. उन्होंने यह भी कहा था कि लोकसभा चुनाव के पहले उनके यहां छापामारी कराई गई. उद्देश्य दबाव बनाना था, लेकिन वह न झुकी और न टूटी .अब विधानसभा चुनाव के पहले फिर अफवाह फैलाया जा रहा है कि वह भाजपा में शामिल होंगी. लेकिन इस बीच 2 अक्टूबर को उनके अस्पताल में भर्ती होने की वजह को लेकर कई तरह की बातें कहीं जा रही है.

     विधायक अंबा प्रसाद ने एक्स पर पोस्ट अस्पताल में भर्ती होने की वजह बताया

    सूत्र बताते हैं कि किसी खास वजह से वह अस्पताल में भर्ती हुई है. इसमें कितनी सच्चाई है यह तो कहा नहीं जा सकता. लेकिन जिस दिन पार्टी छोड़ने की चर्चा थी उसी दिन अस्पताल में भर्ती होने की बात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं. विधायक अंबा प्रसाद ने भी बुधवार की रात को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर अपने अस्पताल में भर्ती होने की वजह को बताया है .जो भी हो बड़का गांव की विधायक अंबा प्रसाद को विशेष परिस्थिति में पढ़ाई छोड़कर उन्हें राजनीति में आना पड़ा था.  झारखंड की सबसे कम उम्र की वह विधायक बनी थी.वैसे झारखंड में 2024 के विधानसभा चुनाव में आया राम और गया राम का खेल शुरू हो सकता है .जिस तरह लोकसभा चुनाव के पहले एक दल छोड़कर दूसरे दल में लोग शामिल हुए, उसी तरह विधानसभा में भी होगा, इसका अंदेशा लगाया जा रहा है.

    कांग्रेस भी इस बार विधानसभा के चुनाव में गंभीर दिख रही है. झारखंड के कांग्रेस चुनाव प्रभारी गुलाम अहमद मीर कह चुके हैं कि अगर कांग्रेस को झारखंड में 25 से 30 सीट आई तो रोटेशन पर मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं.  कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए यह बातें कही गई या सच में कांग्रेस की ऐसी ही कुछ मनसा है. यह तो वक्त पर पता चलेगा. लेकिन इतना तो तय है कि कांग्रेस के भी कई सिटिंग विधायकों को टिकट का खतरा है. ऐसे में कई समय का इंतजार कर रहे हैं.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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