झारखंड में चलने वाली इस ट्रेन की "किस्मत" बदलने में क्यों लगे 32 साल, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    झारखंड में चलने वाली इस ट्रेन की "किस्मत" बदलने में क्यों लगे 32 साल, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD):  झारखंड में चलने वाली इस ट्रेन  की "किस्मत" बदलने में 32 साल लग गए.  धनबाद से टाटानगर के बीच चलने वाली स्वर्ण रेखा एक्सप्रेस की चाल और ढ़ाल  दोनों अब  बदल जाएंगे.  अब यह  ट्रेन एलएचबी रैक  के साथ चलेगी.  गति भी  तेज हो जाएगी.  दरअसल,  एलएचबी रैक की खासियत है कि यह उच्च गति से चलने में सक्षम है.  जिस वजह से ट्रेन को  अपने गंतव्य तक पहुंचने में कम वक्त लगता है.  सुरक्षा की भी कई विशेषताएं है.  जैसे कि  ऑटोमेटिक ब्रेकिंग सिस्टम ,एलएचबी बोगी में अधिक यात्रियों को ले जाने की क्षमता भी होती है.   मेंटेनेंस खर्च भी कम होता है.  बता दें कि धनबाद से टाटानगर के बीच कई सालों से स्वर्ण रेखा एक्सप्रेस चल रही है.  लेकिन इस पर रेलवे का कोई ध्यान नहीं था.  

    लेकिन बुधवार को स्वर्णरेखा एक्सप्रेस को एलएचबी रैक   देने की घोषणा की गई.  जानकारी के अनुसार 25 मार्च  से धनबाद और टाटानगर दोनों ओर से यह  ट्रेन एलएचबी रैक  के साथ चलेगी.  फिलहाल यह  ट्रेन टूटी-फूटी बोगियों  के साथ चल रही थी.  सोशल मीडिया पर भी इसके खिलाफ अभियान चलाया गया था.  रेल मंत्री से लेकर रेलवे के बड़े  अधिकारियों तक इस ट्रेन की दुर्गति का हाल  पंहुचा , उसके बाद 25 मार्च से एलएचबी रैक   के साथ चलाने  की घोषणा की गई.  बताया जाता है कि इसके संयोजन में कोई बदलाव नहीं किया गया है.  फिलहाल ट्रेन नौ  बोगियों  के साथ चल रही है. 

     25 मार्च  से भी ट्रेन 9 कोच के साथ चलेगी. अभी ट्रेन में एक चेयर कार  जोड़ी जाती है.  नए संयोजन में भी ट्रेन में एक चेयर कार  की बोगी जोड़ी जाएगी. एलएचबी  होने से सभी बोगियों  में सीट  की संख्या बढ़ जाएगी, जिस वजह से यात्रियों को सुविधा होगी. 
     ऐसा होने से ट्रेन   की सुस्त चाल भी बदल जाएगी.  पहली  जुलाई "1993 के बाद स्वर्णरेखा एक्सप्रेस में बदलाव किया जा रहा है.  पहली  जुलाई 1993 को यह ट्रेन पटरी पर उतरी थी और उसके बाद अब जाकर 2025 में इसकी सुविधाओं में बढ़ोतरी की गई है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो   


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