कोयलांचल का "नया किंग"! कौन है ढुल्लू महतो जिसने बड़े -बड़े बाहुबलियों के रहते खड़ा कर दिया एक ऐसा साम्राज्य, जहां सिर्फ एक नाम का चलता है सिक्का!


धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल जब से अस्तित्व में आया ,बाहुबलियों को देखता और झेलता रहा. पुराने बाहुबली तो अब नहीं रहे, लेकिन उनका "यूथ विंग" अभी भी कोयलांचल में सक्रिय है. लेकिन फिलहाल कोयलांचल में "नए किंग " के रूप में सांसद ढुल्लू महतो की खूब चर्चा है. उन्हें कोयलांचल का नया किंग कहा जा रहा है. कई बाहुबलियों के रहते हुए भी उन्होंने अपना एक साम्राज्य खड़ा कर लिया है और उस साम्राज्य में किसी दूसरे के प्रवेश की मनाही है. प्रवेश करने पर विवाद होता है. आपको याद होगा कि अभी हाल ही में झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो ने सांसद ढुल्लू महतो पर तेज हमला बोला था. उन्होंने कुछ कंपनियों के नाम भी गिनाये थे. कुछ संपत्ति का डिटेल्स भी दिया था, जिसका संबंध ढुल्लू महतो से बताया गया था.
विधायक जयराम महतो ने भी किये थे कई खुलासे
उन्होंने कहा था कि वह एक रिसर्चर हैं और रिसर्चर जब किसी की खोज के पीछे पड़ जाता है, तो कुछ भी छिपा नहीं रहता। उन्होंने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश में भी संपत्ति का वह खुलासा करेंगे। आगे क्या होगा ,यह तो अलग बात है, लेकिन इतना तो तय है कि धनबाद हो, रांची हो अथवा दिल्ली ,सभी जगह ढुल्लू महतो की चर्चा होती है. कोयले के धंधे पर साम्राज्य को लेकर भी और रामराज मंदिर को लेकर भी. विधायक रहते सांसद बनने की भी और सांसद बनने के बाद भाजपा में विवाद की भी. यह बात भी सच है कि राजनीति अथवा कारोबार, ढुल्लू महतो को विरासत में नहीं मिली है. वह अपनी बदौलत विधायक से संसद तक की कुर्सी पर पहुंचे हैं. अब उनकी गिनती बाहुबली के रूप में भी होती है.
कोयला उठाव में ढुल्लू महतो पर रंगदारी वसूली के भी आरोप लगते रहे
कोयला उठाव में ढुल्लू महतो पर रंगदारी वसूली के भी आरोप लगते रहे हैं. यह अलग बात है कि यह अब तक साबित नहीं हुए. ढुल्लू महतो पर बेनामी संपत्ति बनाने का भी आरोप है. उन पर दर्जनों आपराधिक मामले भी चल रहे हैं. 50 वर्षीय ढुल्लू महतो पहली बार जब विधायक बने, उसके बाद से वह पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1975 के आसपास बाघमारा के चिटाही में उनका गरीब परिवार में जन्म हुआ था. ढुल्लू महतो अपने सभी भाइयों में सबसे छोटे हैं. कहा तो जाता है कि पढ़ाई छूटने के बाद उन्होंने मजदूरी तक का काम किया। लेकिन उसके बाद कोयले के काली दुनिया पर उनकी नजर गई. ढुल्लू महतो 2009 में पहली बार विधायक बने. उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हालांकि इसके पहले ढुल्लू महतो पर झारखंड के काद्यावर नेता समरेश सिंह(अब स्वर्गीय ) की नजर पड़ी और उन्होंने ढुल्लू महतो की आक्रामकता को देखकर राजनीति में लाने की सोची। फिर समरेश सिंह ने बाघमारा में टाइगर फोर्स का गठन किया और ढुल्लू महतो को अध्यक्ष बनाया गया.
2005 में पहली बार आये चुनावी राजनीति में, उसके बाद तो
पहली बार ढुल्लू महतो समरेश सिंह की पार्टी ,झारखंड वनांचल कांग्रेस के टिकट पर 2005 में बाघमारा विधानसभा चुनाव में खड़े हुए. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन 2009 में वह बाबूलाल मरांडी की पार्टी से टिकट पाए और विधायक बन गए. उसके बाद भाजपा में चले गए, फिर उन्होंने 2014 और 2019 में भी बाघमारा का चुनाव जीता। फिर बाघमारा का विधायक रहते हुए 2024 में वह धनबाद के सांसद बन गए. बाघमारा के ही रहने वाले अधिवक्ता सोमनाथ चटर्जी ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत की. शिकायत में रंगदारी वसूलने के भी आरोप हैं. धीरे-धीरे ढुल्लू महतो का विवाद से भी नाता जुड़ता गया. कोयला कारोबार से भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ने के उन पर आरोप लगे. कहा तो यही जाता है कि ढुल्लू महतो की अनुमति के बगैर कुछ चुनिंदा इलाके में कोयला उठता नहीं है.
ढुल्लू महतो ने बाघमारा में एक शानदार रामराज मंदिर का निर्माण कराया है.
राम राज मंदिर की जमीन को लेकर भी रहते हैं चर्चा में
इस मंदिर में जमीन को लेकर भी वह लोगों के निशाने पर रहे. कई लोगों का आरोप है कि मंदिर के लिए जबरन जमीन पर कब्जा कर लिया गया है. यह भी लोग बताते हैं कि जो भी उनका विरोध करता है, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है. कुछ साल पहले कई लोगों ने धनबाद में आकर अनशन भी किया था. बाघमारा के कोयला डीओ होल्डर कन्हाई चौहान ने भी धनबाद में आकर धरना दिया था और ढुल्लू महतो और उनके विधायक भाई पर रंगदारी वसूलने का आरोप लगाया था. एक समय धनबाद के इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स संगठन से भी ढुल्लू महतो का विवाद हो गया था. उसे समय वह विधायक थे. आरोप लगा कि रंगदारी की रकम बढ़ाने के लिए कोयला उठाने नहीं दिया जा रहा है. खैर, जो भी हो, लेकिन इतना तो तय है कि बाहुबलियों के "यूथ विंग" के रहते अपना एक अलग साम्राज्य खड़ा कर लिया है. भाजपा में भी उनकी चलती है और यही वजह है कि विधायक की अपनी खाली हुई सीट पर अपने बड़े भाई शत्रुघ्न महतो को पहले तो टिकट दिलवाने में सफल रहे, फिर जीत दिलाने में भी उनको सफलता मिली।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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