दो राज्यों की पुलिस एक साथ पहुंची धनबाद तो ले गई आठ लोगों को,क्यों पुलिस के लिए चुनौती बन रहा गोबिंदपुर!

    दो राज्यों की पुलिस एक साथ पहुंची धनबाद तो ले गई आठ लोगों को,क्यों पुलिस के लिए चुनौती बन रहा गोबिंदपुर!

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद पुलिस के लिए गोविंदपुर चुनौती बनता जा रहा है.  गोविंदपुर के अपराधी बाहर में क्राइम कर गोविंदपुर में आकर  शरण ले रहे हैं.  जब  बाहर की पुलिस पहुंचती है, तो इसका खुलासा होता है. पहले भी बाहर  के राज्यों में लूट कांड में गोबिंदपुर का नाम आ चुका है. तो  क्या धनबाद के गोविंदपुर को अपराधी शरण स्थली  बना लिए हैं? क्या धनबाद के गोविंदपुर के अपराधी राज्य से बाहर गैंग का संचालन कर रहे हैं? क्या अगल-बगल के लोगों को उनके संदिग्ध गतिविधियों का पता नहीं चलता है? आखिर क्यों पुलिस के पहुंचने के बाद लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं. दरअसल, धनबाद के गोविंदपुर में दो राज्यों की पुलिस पहुंची तो सब कोई आश्चर्य में पड़  गए.  

    जानिए -ओडिशा पुलिस क्यों पहुंची थी 

    ओडिशा  की पुलिस पहुंची तो उत्तर प्रदेश की भी पुलिस पहुंच गई.  ओडिशा  की पुलिस डकैती कांड में तीन लोगों को ढूंढते हुए गोविंदपुर पहुंची थी.  तो उत्तर प्रदेश की  वाराणसी पुलिस साइबर ठगी के एक मामले में गोविंदपुर से पांच को हिरासत में लिया।  जानकारी के अनुसार ओडिशा  के क्योझर पुलिस ने गोविंदपुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। क्योझर   में 2 जनवरी की देर रात 8  डकैतों ने हथियार के बल पर एक कारोबारी के घर धावा बोला था,  वहां से लगभग 17 लाख की संपत्ति लूटकर फरार हो गए थे.  इसमें से तीन अपराधी गोविंदपुर के थे.  पुलिस ने जब जांच तेज की तो उनके गोविंदपुर में होने की जानकारी मिली।  फिर पुलिस पहुंची और तीन को गिरफ्तार किया।  इधर, यूपी की वाराणसी पुलिस साइबर अपराध की एक मामले में पांच युवकों को गिरफ्तार किया है.  यह सभी   एपीके फाइल भेज कर 42 लाख से अधिक की ठगी की थी. 

    उत्तर प्रदेश पुलिस ने क्या -क्या बरामद किया 
     
    वाराणसी पुलिस और गोविंदपुर पुलिस ने संयुक्त छापेमारी कर चार मोबाइल, सिम कार्ड, दिल्ली पुलिस की ओर से जारी दो नोटिस, ग्राम प्रधान का मुहर , और पैड , आधार के अपग्रेडेशन के पांच खाली फॉर्म, 15 लाख कीमत की नई कार , और 66000 नगद बरामद किए हैं.  पुलिस के अनुसार सभी साइबर अपराधी हैं.  अपराधी केवल एपीके फाइल भेज कर ही ठगी नहीं करते थे, बल्कि ठगी  के पैसे ट्रांसफर करने के लिए म्यूचुअल अकाउंट भी खुलवाते थे.  इसके लिए 3 से 5000 रुपए देकर किसी का आधार कार्ड ले लेते थे.  ग्राम प्रधान के फर्जी लेटर पैड, मुहर  तथा आधार अपडेशन फॉर्म का इस्तेमाल कर पता एवं जानकारी बदलवा देते थे.  बदले आधार कार्ड के जरिए बैंकों में खाता खुलवाते थे.  इस म्युचुअल अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर नगदी के रूप में निकासी कर लेते थे.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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