शाबाश -गिरिडीह के स्कूली बच्चे! पढ़िए क्यों कह दिया है कि शराब पीकर गांव में घुसना मना है 

    शाबाश -गिरिडीह के स्कूली बच्चे! पढ़िए क्यों कह दिया है कि शराब पीकर गांव में घुसना मना है 

    धनबाद(DHANBAD): सरकार भी नशा मुक्ति अभियान चला रही है. लोगों को नशे की लत से दूर रहने को प्रोत्साहित कर रही है. कायदे-कानून भी बनाए जा रहे है. स्कूल के अगल-बगल नशे की  सामग्री की बिक्री पर पाबंदी का नियम बनाया गया है. इधर, गिरिडीह जिले के बेंगाबाद प्रखंड के सोनवाद गांव के स्कूली बच्चों ने महुआ शराब के खिलाफ एक अभियान छेड़ रखा है.  इन बच्चों ने गांव की गलियों में दीवारों पर पोस्टर लगाकर इस धंधे का विरोध किया है.  जुलूस भी निकाल  रहे है.  लोगों को सचेत भी कर रहे हैं और चेतावनी भी दे रहे है. पोस्टर  में बच्चों ने शराब बिक्री करने वाले, सेवन करने वाले तथा शराब पीकर गांव में हंगामा करने वालों को सचेत किया है. साथ ही, नहीं मानने वालों को अंजाम भुगतने की भी चेतावनी दी है. पोस्टर  में बच्चों ने लिखा है कि जो व्यक्ति इस गली में रात के 9 बजे के बाद शराब पीने को आएंगे, वह अपनी जिम्मेदारी से आएंगे. क्योंकि यहां रात में आने के बाद सिर से लेकर पांव तक और बाइक इंडिकेटर से लेकर चेचिस तक टूटने का खतरा रहेगा. इन बच्चों का कहना है कि रात  में महुआ शराब के अवैध कारोबार से उन सब की रात की पढ़ाई में परेशानी होती है. शराब पीकर लोग अक्सर हंगामा करते है. यह हालत झारखंड के सिर्फ सोनवाद गांव का नहीं है. 

    ग्रामीण क्षेत्र में महुआ शराब की चुलाई खूब की जाती है 

    ग्रामीण क्षेत्र में महुआ शराब की चुलाई  की जाती है. लोग शराब सेवन को पहुंचते हैं, हंगामा करते हैं, मारपीट करते है. लोगों के पास घर चलाने का खर्च नहीं होता लेकिन शराब में पैसा झोंकते है. यह  लग बात है कि इस काम में सिर्फ गांव वाले ही नहीं, बाहर के लोग भी शामिल होते है. अभी हाल ही में धनबाद उत्पाद विभाग ने टुंडी के सुदूर ग्रामीण इलाकों में छापेमारी कर एक अवैध मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था. बताया गया था कि धनबाद शहर से जाकर लोग वहां अवैध शराब फैक्ट्री चला  रहे थे. गांव वालों को कुछ पैसे की लालच देकर यह सब काम  हो रहा था. जिस जगह पर फैक्ट्री चलाई जा रही थी, वह इतना दुर्गम इलाका था कि वहां जाना किसी के लिए मुश्किल था. इसका फायदा उठाकर अवैध शराब के धंधेबाज  वहां शराब तैयार कराते  थे और उसके बाद जर्किंग में भरकर उसकी सप्लाई करते थे. सोनबाद गांव के स्कूली बच्चों के इस पहल को  पूरा समर्थन मिलना चाहिए. यह अलग बात है कि पुलिस का ध्यान सोनबाद गांव की ओर गया है और अधिकारी कहते हैं कि अभियान चलाया जाएगा.  

    बच्चों ने सरकार और प्रशासन को दिखाया है आइना 

    जो भी हो, लेकिन बच्चों ने एक रास्ता दिखाया है. यह अलग बात है कि धनबाद के कई सुदूर  इलाकों में सालों पहले महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. कई जगहों पर तो अवैध शराब के धंधेबाजों  को उस इलाके में घुसने की महिलाओं के डर से साहस नहीं करते थे. सरकार भी राजस्व बढ़ाने के लिए जगह-जगह शराब की दुकान खोल देती है. यहां तक की मोहल्ले के इलाकों में भी शराब की दुकान की लाइसेंस दे दिए गए है. नतीजा होता है कि मोहल्ले के बच्चों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है. जहां शराब की दुकान होती है, वहां सड़क के किनारे बैठ कर लोग  शराब पीते है. हंगामा भी होता है. सरकार को चाहिए कि एक कमेटी बनाकर यह  जांच कराई कि उत्पाद विभाग किन-किन रिहायसी और शहरी इलाकों में स्कूल, कॉलेज, मंदिरों के अगल-बगल शराब की दुकान चलाने का लाइसेंस दिया है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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