झरिया में भभक" रही है भूमिगत आग, 210 डिग्री तापमान से मिला परमेश्वर के शव का अवशेष, पढ़ें इसके 25 सालों का इतिहास


धनबाद(DHANBAD):104 साल से इंतजार करते-करते झरिया की सुलगती भूमिगत आग,अब "धधकने" लगी है. 1919 में झरिया के भौरा में भूमिगत आग का पता चला था. ये भूमिगत आग अब "कातिल" हो गई है. वैसे पिछले 25 सालों से वो संकेत दे रही है कि हालात बिगड़ने वाले हैं. लेकिन जमीन पर ठोस काम करने के बजाए हवाबाजी होती रही. नतीजा सामने है.
झरिया में भभक" रही है भूमिगत आग
एनडीआरएफ की टीम अगर शनिवार को नहीं पहुंची होती तो परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष भी नहीं निकला होता. झरिया के घनुडीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान आग से फटी जमीन के भीतर गिर गया था. कड़ी मेहनत के बाद 210 डिग्री तापमान के बीच से टीम ने अवशेष को बाहर निकाला. झरिया की ये आग 1995 से ही संकेत दे रही है कि अब उसकी अनदेखी खतरनाक होगी.
कई ऐसी घटनायें हो चुकी है, जिसे अनदेखा किया जाता रहा
1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी. 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमला बहाल में खाना खा रही महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी. फिर इधर 28 जुलाई 2023 को घनुड़ीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान गोफ में चला गया .पहले तो बीसीसीएल प्रबंधन घटना से इंकार करता रहा लेकिन जब मांस जलने की दुर्गंध बाहर आने लगी तो झरिया सीओ की पहल पर NDRF की टीम को बुलाया गया. टीम ने शनिवार को कड़ी मेहनत कर 210 डिग्री तापमान के बीच से परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष निकाला.
भूमिगत आग अब "कातिल" हो गई है
शायद ये धनबाद कोयलांचल में गोफ में गिरे या समाए लोगों के शव का अवशेष निकालने का पहला मामला था. घटना के पहले सारे लोग पल्ला झाड़ते रहते है. घटना होने के बाद राजनीति भी शुरू हो जाती है. लोग अपने अपने ढंग से टीआरपी बढ़ाने के लिए आंदोलन से लेकर सब कुछ करते हैं. लेकिन अग्नि प्रभावित क्षेत्र से लोगों का कैसे पुनर्वास किया जाए, आग बुझाने के लिए क्या जरूरी उपाय होने चाहिए, इसको शुरू कराने के लिए कोई दबाव नहीं बनता .यही वजह है कि झरिया की आग 104 साल के बाद अब सुलग नहीं भभक रही है.
रिपोर्ट-सत्यभूषण सिंह
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