संथाल परगना की त्रासदी : मानव तस्करो का फैलता "डायना" या पेट की आग बुझाने की मज़बूरी, कैसे गवाह बना धनबाद !

    संथाल परगना की त्रासदी : मानव तस्करो का फैलता "डायना" या पेट की आग बुझाने की मज़बूरी, कैसे गवाह बना धनबाद !

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद में एक ऐसा मामला पकड़ में आया है, जिससे यह साबित हो गया कि संथाल परगना से अभी भी मानव तस्करी जारी है. कहा जा सकता है कि मामले बढ़ रहे है. दूसरे प्रदेशों में काम दिलाने के नाम पर झारखंड के बच्चों को बाहर ले जाया जा रहा है. इसके लिए संगठित गिरोह काम कर रहे है. इसका खुलासा धनबाद में वास्को द गामा एक्सप्रेस ट्रेन में हुआ है. बताया जाता है कि मानव तस्करी की रोकथाम करने वाली संस्था झारखंड विकास ट्रस्ट के निदेशक ने रेल एडीजी और धनबाद रेल एसपी को सूचना दी थी कि ट्रेन में बच्चों को ले जाया जा रहा है. 

    जसीडीह में ट्रैन में चढ़ाये गए थे बच्चे 

    जानकारी के अनुसार जसीडीह से खुलते ही ट्रस्ट के निदेशक को नाबालिकों की तस्करी की सूचना मिली थी.  16 बच्चों को मजदूरी कराने  दूसरे राज्य में ले जाया जा रहा था. सूचना पर ट्रस्ट की महिला प्रतिनिधि धनबाद स्टेशन पहुंची.  आरपीएफ , रेल पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम भी पहुंच गई.  ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकते ही जनरल कोच की घेराबंदी कर दी गई और सभी बच्चों को ट्रेन से उतारा  गया. 

    प्रारंभिक जांच में तीन बच्चे बालिग मिले, जबकि तेरह  नाबालिग
     
    यह भी जानकारी है कि प्रारंभिक जांच में तीन बच्चे बालिग  मिले ,जबकि तेरह  नाबालिग. बच्चो ने बताया कि जसीडीह स्टेशन से ट्रेन पर सवार हुए थे. उन्हें काम करने के लिए दूसरे राज्य ले जाया जा रहा था. चार  तस्करों को भी पकड़ा गया है. सूत्र बताते है कि जसीडीह-वास्को द गामा एक्सप्रेस से पिछले सप्ताह भी 10 नाबालिगों का रेस्क्यू किया गया था. उनमें धनबाद, गिरिडीह, पाकुड़ व बिहार के नाबालिग शामिल थे.  बंगाल के बीरभूम जिले के दुबराजपुर व बिहार के बांका निवासी तस्कर को भी पकड़े गए थे. मुक्त कराए गए नाबालिग बोकारो के आश्रय गृह में आवासित किए गए है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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