TNP SPECIAL: धनबाद में कहीं "जंगल राज" तो नहीं, पुलिस पर क्यों भारी पड़ रहे अपराधी 

    TNP SPECIAL: धनबाद में कहीं "जंगल राज" तो नहीं, पुलिस पर क्यों भारी पड़ रहे अपराधी 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद ने  साल "2023 का पुरजोर ढंग से स्वागत किया था.  इसलिए भी किया था कि कोरोना के बाद धनबाद को नए साल के स्वागत करने का अवसर मिला था.  लेकिन इस "2023 ने  धनबाद के लोगों को परेशान कर दिया है.  पुलिस को नाक में दम कर दिया है.  अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनाकर विदेश में बैठा है और वहीं से धनबाद और यहां की पुलिस, झारखंड सरकार और झारखंड एटीएस को लगातार चुनौती दे रहा है.  इन आंकड़ों पर जरा आप भी गौर करिए, यह सब आंकड़े '2023 के ही है. 

    इन आंकड़ों को जरा गौर से देखें 
     
    पहली  जून को तोपचांची  के होटल में बमबारी, फिर 7 जून को ठाकुर मोटर्स के मालिक संजीव ठाकुर को गोली मारना, 27 जून को मछली कारोबारी रसीद महाजन के घर पर फायरिंग, 29 जून को अप्सरा डेर्सेस  के मालिक के निवास पर फायरिंग, 10 जुलाई को गोविंदपुर के बिहारी लाल चौधरी प्रतिष्ठान पर फायरिंग, इसके पहले 14 मार्च को कोयला कारोबारी बंटी चौधरी के घर पर फायरिंग, 8 अगस्त को जिया साइबर कैफे पर फायरिंग, 12 अगस्त को बैंक मोड़ के सलूजा टायर्स पर फायरिंग, 29 अगस्त को बैंक मोड़ के घराना ज्वेलर्स पर फायरिंग, 6 सितंबर को पुटकी के जीवन मेडिकल पर फायरिंग, 11 सितंबर को गोविंदपुर के खालसा होटल पर बमबाजी.

    साढ़े तीन महीने के आकड़े ही डरा रहे है 
      
    यह आंकड़े लगभग साढ़े तीन  महीने के है.  इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सिर्फ ठाकुर मोटर्स के मालिक को ही गोली मारी गई.  वह भी दुकान से बाहर घर जाते वक्त.  बाकी सब घटनाएं डराने- धमकाने और लोगों से रंगदारी वसूलने के लिए ही संभवत की गई है.  सभी घटनाओं का तरीका एक है.  सुनसान जगह और शांत वक्त का इंतजार करने के बाद बाइक से अपराधी पहुंचते हैं, फायरिंग करते हैं या बम चार्ज करते हैं और फिर चले जाते है.  हाल के दिनों में जो घटनाएं की गई हैं , उनमें कारोबारी की हैसियत और उनकी आर्थिक क्षमता नहीं देखी जा रही है.  छोटे-छोटे कारोबारी को भी धमकी मिल रही है.  फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद जिम्मेवारी भी ली जा रही है और सोशल मीडिया पर पर्चा जारी कर धमकाया भी जा रहा है. 
     
    पुलिस और झारखंड एटीएस के कण्ट्रोल में नहीं है गैंग 

     पुलिस और झारखंड एटीएस प्रिंस खान गैंग के कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा. ATS भी कई को दबोचा.  पुलिस दावा करती है कि प्रिंस खान के आर्थिक तंत्र को लगभग तोड़ दिया गया है.  अब वह कम उम्र के लड़के को नशा की और पैसे की लालच देकर गैंग में शामिल करवा रहा है और उन्हीं से फायरिंग करा  दे रहा है.  लेकिन इन घटनाओं से धनबाद में भय  का माहौल तो बन ही गया है.  धनबाद के लोगों के निशाने पर पुलिस है.  सवाल उठता है कि अगर इस गैंग को तुरंत काबू में नहीं किया गया तो कारोबारी  जिस  माहौल में जी रहे हैं, निश्चित रूप से कारोबार समेट लेंगे.  दो दिन पहले जब प्रभारी मंत्री बना गुप्ता धनबाद आए थे तो कारोबारी  उन्हें सब कुछ विस्तार से बताया था.  कारोबारी को मंत्री ने भरोसा दिया था कि सब कुछ नियंत्रण में रहेगा.  लेकिन उसके बाद फिर सोमवार को गोविंदपुर के खालसा होटल में बमबाजी हो गई.  तो क्या कहा जाए कि  धनबाद में जंगल राज कायम हो गया है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

     


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