TNP EXPLANNER: दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष चंपाई के पास और सत्ता की विरासत संभाल रहे हेमंत

    TNP EXPLANNER: दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष चंपाई के पास और सत्ता की विरासत संभाल रहे हेमंत

    रांची (RANCHI) : झारखंड की जब भी बात आएगी तो इसमें शिबू सोरेन के संघर्ष का नाम लिए बिना अधूरा होगा.क्योकि जल जमीन की बात जंगल से उठा कर संसद तक अगर किसी ने पहुंचाया है तो वह दिशोम गुरु है. ऐसे में अब फिर एक आंदोलन के बाद चर्चा है कि शिबू सोरेन का संघर्ष एक पूर्व मुख्यमंत्री लेकर चल रहे है और सत्ता की विरासत CM यानी गुरु जी के बेटे हेमंत आगे बढ़ा रहे है. इस विश्लेषण में बात करेंगे की आखिर यह सवाल कहा से उठने लगा की गुरु जी के संघर्ष को उनके आंदोलन के साथी चंपई उस रास्ते पर बढ़ रहे और हेमंत के पास सत्ता की विरासत है.

    इसे समझने के लिए सबसे पहले 2012 के उस आंदोलन को याद करना होगा जब शिबू सोरेन ने रांची में उलगुलान का एलान कर दिया था. हल और बैल लेकर लोग रिंग रोड की जमीन पर पहुँच गए थे और एक नारा दिया था-"हरवा तो जोतो ना रे....." बस इसी नारे को लेकर चम्पाई 13साल बाद फिर से जमीन पर उतर गए है, और गुरु जी के सपने को पूरा करने की बात कह रहे है.

    दरअसल वह जमीन कोई और नहीं बल्कि नगड़ी मौजा की वही जमीन है जहां स्वास्थ्य विभाग RIMS-2 बनाने का प्रस्ताव बना चुकी है. लेकिन अब गुरु जी तो नहीं उनके साथी चंपाई सोरेन ने आंदोलन छेड़ दिया है. जिसमें वह गुरु जी के नारे के साथ उलगुलान का एलान कर दिया और सरकार के सामने टेंशन खड़ा कर दिया.

    24 अगस्त को जब नगड़ी में चंपाई ने हल जोतो रोपा रोपो आंदोलन का एलान किया तो लम्बे समय के बाद ऐसा पहली बार दिखा जब हजारों आदिवासी जमीन पर उतर गए ऐसा गोलबंद हुए कि पुरे राज्य ने देखा कि आदिवासी अभी भी अगर कुछ ठान ले तो वह पूरा करते है.

    इस आंदोलन का एलान जिसने किया उस चंपाई सोरेन को हॉउस अरेस्ट किया गया, लेकिन इसके बावजूद खुद से आदिवासियों की फ़ौज नगड़ी की उस जमीन पर पहुंची जहां चारो ओर पुलिस का पहरा था. जब रोड पर सभी को रोका गया तो खुद से रस्ते को तलाशते हुए खेत खलियान होते हुए उस जमीन तक पहुंच गए और हरवा तो जोतो ना रे नारे लगाते हुए रोपा रोप दिया.

    ऐसे में आंदोलन के बाद चर्चा शुरू हुई और लोग दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष की विरासत चंपाई के पास होने की बात करने लगे. इस मामले में झारखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार बताते है कि चंपाई भले ही भाजपा में हो लेकिन अभी भी गुरूजी के मार्गदर्शन में राजनीति कर रह है उनके संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं.

    वहीं दूसरे राजनीतिक जानकार का मानना है कि चंपाई के पास अगर संघर्ष की विरासत है तो हेमंत के पास गुरूजी के सत्ता की विरासत है. यह वो ताकत है जिससे हेमंत गुरूजी के सपने को पूरा करने में लगे है. गुरु के बाद झारखण्ड में ऐसा कोई पहली बार CM बना है जो एक अभिभावक के रूप में काम कर रहा है. राजनीति अपने जगह और जब कोई परेशानी में होता है तो हेमंत खड़े दिखते है चाहे वह भाजपा का हो या झामुमो. सभी के साथ इनके संबंध बेहतर है

    लेकिन जिस तरह से गुरु जी के संघर्ष की विरासत को लेकर चम्पाई आगे बढ़ रहे है और आदिवासियों का साथ मिल रहा है यह संकेत किसी सरकार के लिए सही नहीं है. गुरु के जाने के बाद जिस अंदाज में चंपाई आंदोलन कर रहे है यह राज्य सरकार के लिए सही नहीं है.


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