यह अभागी मां तो शायद यही कह रही है -'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी' 

    यह अभागी मां तो शायद यही कह रही है -'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी' 

    धनबाद(DHANBAD) : 'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी' कविता की ये पंक्तियां मानो धनबाद के SNMMCH में अपनों का इंतजार कर रही महिला के जीवन की कहानी कह रही  है. यह अभागी मां अपनी कोख पर रोए कि अपने इस दुर्दिन पर आंसू बहाये. अस्पताल में भर्ती इस महिला को देखने के लिए चार-पांच दिन बाद भी कोई नहीं आया. धनबाद हीरापुर की रहने वाली वृद्ध सावित्री देवी को अभी भी परिवार जनों का इंतजार है. डॉक्टर कहते हैं कि इलाज तो वह करेंगे, लेकिन ऑपरेशन बिना किसी परिजन के आए नहीं हो सकता. उसे ऑपरेशन की जरुरत है. इस अभागी मां  का बेटा तो पहले ही साथ छोड़ दिया था, आश्वासन के बाद बेटी भी नहीं पहुंची. महिला बताती है कि उसकी बेटी जामताड़ा में रहती है. वृद्ध सावित्री की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे है. या तो गनीमत है कि उसकी दशा देखकर अस्पताल कर्मियों को दया आ गई.  अस्पताल कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए निर्णय लिया है कि चंदा  से वृद्ध का इलाज कराएंगे, सावित्री पूरी तरह से टूट गई है.  दिनभर रोती रहती है. शहर के कोई समाजसेवी या सामाजिक संस्था भी इस महिला के लिए कोई मतलब के नहीं है.  

    अस्पताल कर्मी और नर्स महिला की देखभाल कर रहे है

    अस्पताल कर्मी और नर्स उस महिला की देखभाल कर रहे है. अस्पताल कर्मचारियों की माने तो परिजनों के आने पर दो -तीन दिनों   में ऑपरेशन हो जाएगा.  इसमें जो खर्च होगा इसके लिए कर्मचारी आपस में चंदा करके जुटा लेंगे.  महिला ने बड़े कष्ट से बच्चों को पाला होगा. क्या इसी दिन के लिए उनकी परवरिश की होगी  कि जब उसे जरूरत पड़ेगी तो सभी  साथ छोड़ देंगे. इस लाचार महिला की कहानी  दिल दहलाने वाली है. क्या एक मां इसी दिन के लिए 9 महीने का कष्ट झेलकर बेटा या बेटी पैदा करती है कि बुढ़ापे में उसकी जरूरत के हिसाब से कोई उसकी मदद नहीं करेगा.  सोमवार से अस्पताल में महिला पड़ी है. अपनों की राह देख रही है.  जिस बेटे को 9 महीने कोख में रखा, बड़ा किया, जिस पोते के लिए सब कुछ किया, जिस परिवार के लिए अपनी सारी खुशियां लूटा दी, लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव पर सब साथ छोड़ गए. अस्पताल में अकेले महिला को  छोड़कर उसके परिवारजन भाग चले. फोन पर भी बात करना मुनासिब नहीं समझे.अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने महिला की पीड़ा देखी और सुनी तो परेशान हो गए. महिला का इलाज किया,उसे भर्ती कर लिया. 

    ऑपरेशन के लिए परिजनों का आना जरूरी है

    महिला की कमर की हड्डी टूटी हुई है. डॉक्टर तो ऑपरेशन करने को तैयार हैं, लेकिन ऑपरेशन के लिए परिजनों का आना जरूरी है. पर महिला के परिजन कोई आने को तैयार नहीं है. प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि सुबह एक वृद्ध महिला को एक युवक टोटो से लेकर ओपीडी पहुंचा और उतार कर चला गया.  काफी देर तक वृद्ध महिला जमीन पर पड़ी रही. वह दर्द से कराह रही थी. कर्मचारियों की जब नजर पड़ी तो पूछताछ की. महिला ने बताया कि उनका नाम सावित्री देवी है और वह हीरापुर तेली पाड़ा की रहने वाली है. उनकी कमर की हड्डी टूटी हुई है. पोता दीपक उसे यहां लेकरआया था और छोड़कर चला गया. महिला ने फोन नंबर भी दिया. कर्मचारियों ने जब कॉल किया तो कोई रिस्पांस नहीं मिला. अंत में कर्मचारी उसे लेकर हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे. डॉक्टर ने जांच किया तो कमर की हड्डी टूटी हुई पाई गई. डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया है. महिला को सर्जरी की जरूरत है लेकिन परिजनों के आए बिना यह कैसे संभव होगा. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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