Big News : पलामू में ईलाज के लिए नहीं थे पैसे तो 50 हजार में बेच दिया जिगर के टुकड़े को

    Big News : पलामू में ईलाज के लिए नहीं थे पैसे तो 50 हजार में बेच दिया जिगर  के टुकड़े को

     


    PALAMU : भूख, गरीबी, बेकारी, पलायन, नक्सलवाद की समस्याओं से जूझते हुए पलामू जिले के लेस्लीगंज थानाक्षेत्र के लोटवा कामलकेडिया गांव से एक झकझोर देने वाली ख़बर सामने आई है. जो किसी भी सभ्य व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देगा.आखिर कैसा समाज कैसी  व्यस्था है. हर नवजात अपनी मॉं-पिता के कलेजे का टुकड़ा होता है.‌ जिन बच्चों को पालने-पोसने और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए परिजन हर कुकर्म-सुकर्म करने को हर वक्त तैयार रहते हैं.वैसे ही एक कलेजे के टुकड़े को रामचंद्र राम और पिंकी देवी नामक दंपति ने बीमारी और गरीबी के कारण महज पचास हजार रूपये में बेच दिया.

    उक्त दंपति ने साफ शब्दों में स्वीकार किया है कि उन्होंने बीमारी का इलाज करवाने और पेट की आग बुझाने के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को बेचा है.यह परिवार भूमिहीन और आवास हीन है.ये फिलहाल पूर्व विधायक द्वारा बनवाये गये एक सरकारी शेड में अपने अन्य चार छोटे-छोटे बच्चों के साथ रह रहे हैं जो पुराना और जर्जर है .

    दरअसल, पिंकी अपने नैहर लेस्लीगंज थानाक्षेत्र के लोटवा कामलकेडिया गांव में अपने पति के साथ पिछले डेढ़ दशक से रह रही है.उसका पति रामचंद्र राम, जिसका घर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में है, वह भी प्रारंभ से ही अपनी पत्नी के साथ रहता है.दोनों मिलकर मजदूरी करते हैं और जिस दिन काम नहीं मिलता, उस दिन गांव के अन्य लोगों से मांगकर खाते हैं. इस दंपति के पास आधार कार्ड तक नहीं है .न सरकारी राशन मिलता है और न ही अन्य किसी सरकारी योजना का लाभ मिल पाया है.

    पिंकी ने बताया कि उसके पिताजी ने उन्हें आधा कट्ठा जमीन दी है लेकिन वे पैसे की तंगी के कारण उसमें घर नहीं बना सके.

    मीडिया कर्मियों और कैमरे ने उस जगह के हालात देखे जहां पिंकी का परिवार रहता है.वहां पर न पर्याप्त अनाज था, न ही बर्तन . दंपति ने बताया कि ऐसा कभी कभी ही होता है कि उन्हें दोनों वक्त का भोजन नसीब हो जाए .अशिक्षा इस कदर की ठीक से खुद का पालन पोषण करने की क्षमता भी नहीं रखने वाले इस दंपति ने चार संतानों के बाद भी पांचवां जना.

    रामचंद्र राम ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन करता है.पहले ससुराल में ही रहता था. बाद में ससुराल वालों ने उसे आधा कट्ठा जमीन देकर अलग कर दिया.वह उसी जमीन में झोपड़ी बनाकर रहता था । लेकिन इस बार की बारिश ने उसकी झोपड़ी को भी तहस-नहस कर दिया। उसके बाद वह लोटवा में बने इस सरकारी शेड में आ गया और तबसे उसका परिवार यहीं रहता है।पिंकी ने कहा कि रक्षाबंधन के दिन इसी शेड में उसने एक बालक को जन्म दिया था । बेटा था.उसके बाद वह बीमार हो गयी .लगातार बारिश की वजह से पति काम पर नहीं जा पा रहा था.न तो इलाज के लिए पैसे थे और न ही खाने के लिए.

    मजबूरी में उन्होंने आपस में राय करके लातेहार के एक दंपति के हाथों अपना बेटा 50 हजार रूपये में बेच दिया .खरीदने वाला दंपति का लोटवा चटकपुर में बहन का घर है.उन्हीं लोगों ने मध्यस्थता कर पचास हजार में सौदा तय किया था.

    मामला प्रकाश में आने के बाद मौके पर सीडब्ल्यूसी की टीम पहुंची और दंपति को मदद का भरोसा दिलाते हुए कहा कि बिके हुए बच्चे को वापस दिलाने और शेष बच्चों के भरण पोषण और पढ़ाई की व्यवस्था करेंगे.

    सीओ सुनील कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी हुई है .पूरी जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई करेंगे .स्थानीय मीडिया कर्मियों के मुताबिक बीडीओ सुकेशनी केरकेट्टा ने संबद्ध डीलर रमेश राम को उक्त परिवार को अनाज देने के लिए कहा है और यह भी कि सरकारी प्रावधान के मुताबिक इस परिवार की वे मदद करेंगी।लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि समाचार लिखे जाने तक बीडीओ और सीओ उस परिवार से मिलने तक नहीं पहुंचे थे।


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