प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति के हर्ष में रांची: मंदिर में बंटा 11 मन लड्डू, युनिवर्सिटी में थिरके छात्र


रांची (RANCHI): झारखंड की पहली आदिवासी राज्यपाल रहीं द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति भी बन चुकी हैं. आज उन्होंने शपथ लेने के बाद झारखंड के वीर-पुरखों को स्मरण भी किया. कहा कि धरती आबा से उन्हें प्रेरणा मिलती है. उनके राष्ट्रपति बनने पर रांची में भी हर्ष की फिजा है. सुबह राँची धुर्वा सूर्य मंदिर में 11 मन लड्डू का वितरण किया गया, तो दोपहर तक मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय कैंपस में उल्लास की बयार बहने लगी. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के समन्वयक डॉ. हरि उरांव की अगुवाई में नवों भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष समेत शिक्षक, शोधार्थी और छात्र छात्राएं मांदर, ढोल, नगाड़ों की थाप पर इस खुशी में जमकर झूमे और मिठाईयाँ भी बांटी गई.

शिक्षक और छात्रों ने कहा कि झारखंड में बतौर राज्यपाल रहते हुए द्रौपदी मुर्मू ने रांची विश्वविद्यालय के लिए बहुत कुछ किया है. खासकर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग को नया स्वरूप उन्होंने ही दिया. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ-साथ उन्हीं की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण एक छत के नीचे आज 9 जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की अलग-अलग स्वतंत्र विभाग अस्तित्व में आया. इतना ही नहीं राजभवन में उन्होंने करमा पर्व और सरहुल पर्व मना कर एक नयी परम्परा की शुरुआत भी की थी. जिसमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की पूर्ण सहभागिता रहती थी.
शिक्षकों ने राष्ट्रपति के द्वारा 'जोहार' शब्द से संबोधन करने पर कहा कि प्रकृति के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव ही जोहार है. उनके संबोधन से आज यह शब्द ग्लोबल हो गया है. इस पर हम सबों को गर्व है. चूंकि यह झारखंड के आदिवासी और मूलवासियों की संस्कृति रही है. परम्परा रही है.
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