धनबाद के एक साधारण चप्पल के "विशेष" बनने में आया ट्विस्ट, जानिए बाबूलाल के ट्वीट के बाद कैसे टूटी अधिकारियों की नींद

    धनबाद के एक साधारण चप्पल के "विशेष" बनने में आया ट्विस्ट, जानिए बाबूलाल के ट्वीट के बाद कैसे टूटी अधिकारियों की नींद

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद में एक साधारण चप्पल के "विशेष" बनने की कहानी में ट्विस्ट आ गया है. प्रताड़ना से आहत अस्पताल में भर्ती रेल कर्मचारी बसंत उपाध्याय से मिलने धनबाद के डीआरएम भी अस्पताल पहुंचे और रेल यूनियन ईसीआर के यू ने भी चुप्पी तोड़कर रेल कर्मचारी के पक्ष में खड़ी हो गई है. यह सब हुआ है कई दिनों की चुप्पी के बाद. धनबाद के डीआरएम की पत्नी को चप्पल खोलकर डॉक्टर के चेंबर में जाने का अनुरोध करने का परिणाम भुगत रहे  रेल कर्मचारी बसंत उपाध्याय पिछले 4 दिनों से अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. आरोप के मुताबिक डीआरएम कार्यालय में उनके कपड़े उतरवाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई. यह मामला रेल मंत्रालय और पीएमओ तक पहुंच गया. मामला जब गंभीर हो गया तब रेल अधिकारियों को यह समझ में आया कि इस मामले में कहीं ना कहीं फंस रहे हैं. इसलिए इस मामले को हल्का करने में जुट गए हैं.

    बाबूलाल मरांडी ने रेल मंत्रालय को किया था ट्वीट 

    बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को लेकर रेल मंत्रालय को ट्वीट किया था. किसी ने उस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया. इसके बाद यह मामला गंभीर हो गया. पिछले 4 दिनों से धनबाद रेल मंडल में यह घटना चर्चा में है. अधिकारी के चेंबर में जाइए या कार्यालय के परिसर में, सब जगह यही चर्चा चल रही है.

    यह है पूरा मामला 

    मामला ऐसा था कि डीआरएम की पत्नी रेल अस्पताल में अपने दांत का इलाज कराने गई थी. गेट के बाहर प्रतिनियुक्त कर्मचारी बसंत उपाध्याय ने मैडम से अनुरोध किया कि चप्पल उतार कर चेंबर के भीतर जाएं. मैडम ने चंपल तो नहीं उतारा लेकिन इलाज कराकर जाने के बाद पता नहीं क्या शिकायत की कि सीएमएस बसंत उपाध्याय को अपनी गाड़ी में बैठा कर डीआरएम ऑफिस ले गए.  आरोप के मुताबिक डीआरएम के आदेश पर उनके पीए ने कर्मचारी को बहुत भला बुरा कहा. यहां तक कि कोरिडोर में उसके कपड़े उतरवा लिए गए. इस घटना ने रेल कर्मचारियों में आक्रोश भर दिया. कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर चले गए. उसके बाद रेल अधिकारी अस्पताल पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने बुझाने का प्रयास किया. इसके बाद यह मामला मीडिया में सुर्खियों में आया .पहले तो इसे गंभीरता से नहीं लिया गया लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के ट्वीट के बाद यह मामला और गंभीर हो गया.

     रेल प्रशासन सवालों के घेरे में 

    कर्मचारी बसंत उपाध्याय की पत्नी का आरोप था कि रेलवे के  किसी भी अधिकारी ने अस्पताल आकर हाल जानने की कोशिश नहीं की. इसके बाद डीआरएम अस्पताल पहुंचे. उनके साथ एडीआरएम, सीएमएस, आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट गए थे. डीआरएम ने रेल कर्मचारी से उनका हालचाल लिया. भरोसा दिया कि रेल प्रशासन उनके साथ है. DRM के बदले हुए रूप को देखकर निश्चित रूप से बसंत उपाध्याय को भी राहत मिली होगी. इधर, उदासीन रवैया अपनाने वाली  एकमात्र मान्यता प्राप्त यूनियन ईसीआर के यू की भी नींद टूट गई है और वह भी इस मामले को लेकर गंभीर हो गई है. देखना है आगे इस मामले में और कोई ट्विस्ट आता है अथवा यह मामला जांच के जंजाल में उलझ कर रह जाता है.  बहर हाल रेल कर्मचारी के साथ इस तरह के व्यवहार की सर्वत्र निंदा की जा रही है और रेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. शिकायत पीएमओ तक पहुंचने के बाद क्या नए ढंग से कोई जांच शुरु होती है अथवा रेल अधिकारियों की रिपोर्ट पर ही पीएमओ भरोसा करता है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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