झरिया में पानी ने जनप्रतिनिधियों की आंखों की "पानी" को सुखा दिया है,रोज हो रही है सड़क जाम लेकिन कोई राहत नहीं 

    झरिया में पानी ने जनप्रतिनिधियों की आंखों की "पानी" को सुखा दिया है,रोज हो रही है सड़क जाम लेकिन कोई राहत नहीं 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद की झरिया सरकार की हर घर जल योजना के बीच पानी के लिए लड़ाई लड़ रही है. रोज झरिया के किसी न किसी इलाके में जनता सड़क पर होती है. पानी की मांग करती है, बिजली की मांग करती है, सड़क की मांग करती है, धूल कण से निजात की मांग करती है. अब तो कम से कम पानी के लिए सरकारी व्यवस्था पर इनका भरोसा उठ गया है. अब यह लोग भगवान पर ही भरोसा कर रहे हैं. अगर ऐसी बात नहीं होती तो भौरा बाजार के लोगों ने पानी के लिए अखंड कीर्तन, जाप का आयोजन नहीं किया होता.

    पिछले 3 महीनों से पानी की किल्लत झेल रहे लोग 

    भौरा में भगवान शिव व गंगा की पूजा अर्चना की गई. खाली बाल्टी रखकर पूजा की गई. लोगों ने कहा कि 3 किलोमीटर दूर जाकर दामोदर नदी में नहाते और कपड़ा धोते हैं. झरिया में सोमवार को भी सड़क जाम हुई और मंगलवार को भी सड़क जाम हुई. लेकिन किसी भी दल का कोई भी जनप्रतिनिधि सड़क जाम कर पानी मांगने वालों के पास नहीं गया. उनके आंसू नहीं पोछे. जनता नारेबाजी करती रही, नेताओं को खोजती रही लेकिन किसी भी दल का कोई नेता उनके बीच नहीं गया. अधिकारी भी जनता का सामना करने से बचते रहे. पुलिस भी पहुंची जरूर लेकिन अपने को विवश पा रही थी. सड़क जाम करने वालों के सवालों के आगे निरुत्तर थी. लोग कह रहे थे कि पिछले 3 महीनों से पानी की किल्लत झेल रहे हैं. हाल फिलहाल के दिनों में तो एक बूंद पानी भी घर में नहीं टपका है. ऐसे में उन लोगों का जीवन यापन कैसे चलता है ,यह तो वही जान सकते हैं.

    आंदोलन करते हैं ,आश्वासन मिलता है लेकिन पानी नहीं मिलता.

    कोयलांचल में पानी की समस्या कोई नहीं बात नहीं है. लेकिन आज के इस जमाने में भी अगर 3 किलोमीटर दूर जाकर लोगों को नहाना और कपड़ा धोना पड़ रहा है तो यह दुर्भाग्य नहीं तो और  क्या कहा   जा सकता है. झरिया के लोग पानी और बिजली की समस्या से अब अजीज आ गए हैं. लेकिन करें भी तो क्या करें .जब धैर्य टूटता है तो सड़क पर आते हैं, आंदोलन करते हैं ,आश्वासन मिलता है लेकिन पानी नहीं मिलता. झरिया इलाके में दामोदर नदी से पानी सप्लाई की व्यवस्था है. लेकिन इस व्यवस्था में इतने झोल हैं कि लोगों को कभी पानी मिलता नहीं है. पानी के इस आंदोलन में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. उनका कहना है कि पानी के बिना जिंदगी मुश्किल हो गई है. सबसे आश्चर्य की बात है कि बात-बात में आंदोलन करने वाले किसी भी दल के जनप्रतिनिधि को अब इतनी साहस नहीं रह गई है कि वह पानी के मुद्दे पर जनता का सामना कर सके.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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