झारखंड में चुनाव के पहले चुनाव का रंग, पढ़िए अबतक किसको मिली कितनी सफलता

    झारखंड में चुनाव के पहले चुनाव का रंग, पढ़िए अबतक किसको मिली कितनी सफलता

    धनबाद(DHANBAD): चुनाव के पहले चुनाव का माहौल, कम से कम झारखंड में तो यही दिख रहा है. सब एक दूसरे के खिलाफ तीर चला रहे है. हर पार्टी एक दूसरे के निशाने पर है. विधानसभा अध्यक्ष की  राज  भवन पर टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल थोड़ा अधिक गर्म हो गया है. एक पक्ष कहता है कि राजभवन अपने संवैधानिक अधिकारों से अलग हटकर काम कर रहा है. तो दूसरा पक्ष कहता है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद भी संवैधानिक है. उनको भी पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए और पार्टी के पक्ष में कुछ बोलना भी नहीं चाहिए. झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्रीय समिति सदस्य सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्यपाल की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि राज्यपाल का काम राज्य सरकार के निर्णय और कार्यों में उचित परामर्श देने का होता है. केंद्र की योजनाओं का प्रचार -प्रसार करने का काम उनका नहीं है. 

    एक नए  ट्रेंड की शुरुआत बता रहा झामुमो 
     
    देश में एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है, जो लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा. दूसरी ओर भाजपा नेता विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे है. कांग्रेस के लोग भी  दिल्ली की दौड़ लगा रहे है. भाजपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा और  कांग्रेस चुनावी अभियान में जुटते दिख  रहे है. भाजपा के केंद्रीय मंत्री,  केंद्रीय नेता कैंप  कर रहे है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का दौरा हो चुका है. इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी  झारखंड आ चुके है. भाजपा ने 3 लोकसभा चुनाव को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया है और उसी के हिसाब से चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार हो रही है. उनकी योजना है कि लोकसभा के जिन विधानसभा क्षेत्रों में वोट कम आये  हैं ,वहां विशेष फोकस किया जाए. वैसे तो संथाल परगना झारखंड में सभी पार्टियो  के केंद्र में है.

    संथाल परगना की तीन लोक सभा सीटें हो रही कीमती 

    झारखंड के संथाल परगना में लोकसभा की  3 सीट है. दुमका, गोड्डा  और राजमहल, राजमहल सीट  झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास है तो दुमका और गोड्डा  भाजपा के पास है. संथाल परगना की  तीनों सीटों पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा प्रयास कर रही है तो झारखंड मुक्ति मोर्चा की कोशिश है कि एक नहीं, तीनों  सीट पर विजय मिले. 30 जून को भोगनाडीह से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हो सकता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के चुनाव प्रचार का शंखनाद  करे. उसके बाद सक्रियता अधिक हो सकती है. वैसे संथाल परगना इस बार सभी पार्टियों के केंद्र में है. पहले भी रहता था. झारखंड मुक्ति मोर्चा के रीढ़ की हड्डी  संथाल परगना  है और भाजपा चाहती है कि इसको  तोड़ दिया जाए. देखना है कि आगे- आगे होता है क्या. चुनाव में अभी देर है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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