झारखंड के 13 जिलों में पारा 10 डिग्री से नीचे, कंबल के इंतजार में ठिठुर रहे लोग

    झारखंड के 13 जिलों में पारा 10 डिग्री से नीचे, कंबल के इंतजार में ठिठुर रहे लोग

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): झारखंड में कड़ाके की ठंड ने गरीब और जरूरतमंद लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. राज्य के 13 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच चुका है, लेकिन अब तक कई जिलों में कंबल वितरण शुरू नहीं हो सका है. हालात ऐसे हैं कि आधी सर्दी बीत जाने के बावजूद कई जगहों पर कंबल की खरीद के लिए टेंडर तक नहीं हुआ है.

    जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री से नीचे चला गया है. इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक गरीबों के बीच कंबल का वितरण नहीं किया गया. रिक्शा चालक, ठेला चालक, ऑटो चालक और मांग कर जीवनयापन करने वाले लोग प्लास्टिक के बोरे और अलाव के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं. राज्य के अन्य इलाकों की स्थिति भी गंभीर है. रांची के कांके क्षेत्र में तापमान 3 डिग्री के आसपास पहुंच गया है. कुल 13 जिलों में न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया है.

    24 जिलों में से सिर्फ 6 में टेंडर फाइनल
    जानकारी के मुताबिक, राज्य के 24 जिलों में से केवल लोहरदगा, गुमला, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा और गिरिडीह में ही कंबल का टेंडर फाइनल हुआ है, लेकिन इन जिलों में भी अभी तक वितरण शुरू नहीं हुआ है. बाकी जिलों में अब तक कंबल की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है.

    राज्य सरकार को कुल 9.20 लाख कंबल की खरीद करनी है, जिसके लिए 30 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. विभागीय सचिव ने सभी जिलों में 15 दिसंबर तक कंबल वितरण का निर्देश दिया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा.

    सड़क पर रात गुजारने को मजबूर लोग
    ठंड के कारण शाम होते ही शहर की सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है, लेकिन रोजी-रोटी के लिए मजबूर रिक्शा और ठेला चालक देर रात तक काम करते हैं. कई लोगों का तो स्थायी ठिकाना भी नहीं है और वे अपने रिक्शे पर ही रात गुजारते हैं.

    फिरोज मलिक (ठेला चालक) और इम्तियाज (रिक्शा चालक) का कहना है कि पिछले साल कंबल मिल गया था, लेकिन इस बार अब तक कोई मदद नहीं मिली. मजबूरी में बोरा ओढ़कर और अलाव जलाकर रात काटनी पड़ रही है.

    कंबल को लेकर शुरू हुई सियासत
    कंबल वितरण में देरी को लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है. भाजपा विधायक पूर्णिमा दास साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल हीटर और मोटे कंबल में सो रहा है, जबकि गरीब लोग सड़क पर ठंड से जूझ रहे हैं. ठंड बीत जाने के बाद कंबल बांटने का क्या मतलब?”

    झामुमो ने भी किया पलटवार 
    वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता मोहन कर्मकार ने माना कि कंबल वितरण में देरी हुई है. उन्होंने कहा कि उपचुनाव और राजनीतिक अस्थिरता के कारण कुछ योजनाएं प्रभावित हुईं, लेकिन मुख्यमंत्री इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही सभी जिलों में कंबल का वितरण शुरू किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर भी पलटवार करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान कंबल घोटाले हुए थे, जबकि मौजूदा सरकार गरीबों का हक नहीं मारेगी.

    दिसंबर की कड़ाके की ठंड, कोहरा और शीतलहर में गरीब और बेसहारा लोग कंबल के इंतजार में हैं. एक तरफ राजनीति जारी है, दूसरी तरफ न तो सरकार और न ही कोई सामाजिक संस्था इन जरूरतमंदों की सुध लेती नजर आ रही है. अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन कब जागता है और गरीबों तक कंबल कब पहुंच पाता है.

    रिपोर्ट : रंजीत ओझा


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