हजारीबाग के प्रवासी मजदूर तसलीम अंसारी की मुंबई में मौत, झारखंडी एकता संघ के सहयोग से शव भेजा गया गांव

    हजारीबाग के प्रवासी मजदूर तसलीम अंसारी की मुंबई में मौत, झारखंडी एकता संघ के सहयोग से शव भेजा गया गांव

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जाने वाले झारखंड प्रदेश के प्रवासी मजदूरों की मौत होने का सिलसिला नहीं थम रहा हैं. हजारीबाग जिला, विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम टेकवाडीह पंचायत नवादा निवासी रोजन अंसारी के 45 वर्षीय पुत्र तसलीम अंसारी की अचानक तीन दिन पहले तबियत ख़राब हो गई, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए लायन ताराचंद बापा हॉस्पिटल सायन में भर्ती कराया गया था. यहाँ इलाज के दौरान तसलीम कि बीते मंगलवार को मौत हो गई. मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया एवं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

    जानकारी के अनुसार तसलीम अंसारी कुछ दिन पहले ही रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे. मुंबई में वह सिलाई का काम करते थे और अपने परिवार का भरन पोषण करता था. तसलीम अंसारी घर का अकेला कमाऊ व्यक्ति था. वहीं इस घटना की सूचना मृतक के गांव वालों ने 20 वर्षों से प्रवासी मजदूरों के हितार्थ में कार्य करने वाली संस्था झारखंडी एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी और संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता असगर खान को दिया था. संघ के प्रवक्ता असगर खान तत्काल हॉस्पिटल पहुंचे और परिवार वालों एवं गांव वालों को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. कागजी प्रक्रिया कराकर आर्थिक सहयोग के साथ पार्थिव शरीर को गांव भेजने में काफी मदद की और आज एम्बुलेंस से शव को पैतृक गांव नवादा भेजा गया. झारखंडी एकता संघ के टीम द्वारा मृतक के परिवार वालों को झारखंड सरकार द्वारा ₹50,000/- सहयोग राशि दिलाई जाएगी. 

    मौत को लेकर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष फिरोज आलम, उपाध्यक्ष सलीम अंसारी, सदरुल शेख़, विनोद प्रसाद, ताज हसन अंसारी, असगर खान, तौफीक अंसारी, संतोष कुमार, प्रकाश यादव, राजेंद्र शर्मा, रवि कुमार, मुन्ना प्रसाद और मुस्तकीम अंसारी ने दुःख प्रकट करते हुए कहा, कि झारखंड के प्रवासी मजदूरों का मौत के मुंह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की मौतें देश एवं विदेशों में हो चुकी है. झारखंड सरकार प्रवासी मजदूरों के हित में कुछ पहल नहीं कर पा रही है और मजदूरों का पलायन तेजी से लगातार हो रहा है. झारखंडी एकता संघ मुंबई अब तक लगभग 291 प्रवासी मजदूरों का शव गांव झारखंड भेज चुकी है. संघ 20 वर्षो से सरकार से प्रवासी कल्याण आयोग के गठन की मांग कर रही है, लेकिन सरकार इस पर मौन है. यह आयोग बनने से झारखंड प्रदेश के बाहर रोजगार के लिए गए प्रवासी मजदूरों का सुरक्षा एवं सहायता मिल सकेगा.


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